मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की युगल पीठ ने ग्वालियर एयरपोर्ट से सीमित हवाई सेवाओं के मुद्दे पर केंद्र सरकार, नागरिक उड्डयन मंत्रालय और संबंधित एयरलाइंस कंपनियों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने सभी पक्षों से चार सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने शहर से नियमित उड़ानों की कमी पर चिंता जताते हुए कहा कि यात्रियों की जरूरतों के अनुरूप सेवाएं उपलब्ध कराना आवश्यक है।
यह मामला जनहित याचिका के माध्यम से कोर्ट के समक्ष लाया गया। क्रेडाई अध्यक्ष सुदर्शन झवर ने याचिका दायर कर ग्वालियर से सीमित उड़ानों का मुद्दा उठाया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ सिजौरिया ने पक्ष रखते हुए बताया कि एयरपोर्ट की क्षमता और यात्री संख्या के अनुपात में सेवाएं बेहद कम हैं। कोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद याचिका को सुनवाई योग्य माना और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए।
ग्वालियर एयरपोर्ट
याचिका में कहा गया है कि पिछले कुछ वर्षों में ग्वालियर से हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या में 25 से 26 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। इसके बावजूद शहर से कई प्रमुख महानगरों के लिए सीधी उड़ानें उपलब्ध नहीं हैं। यात्रियों को दिल्ली या अन्य शहरों के लिए पहले सड़क या रेल मार्ग से जाना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की अतिरिक्त लागत आती है।
पूरा उपयोग नहीं
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि ग्वालियर एयरपोर्ट के निर्माण और विस्तार पर लगभग 450 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। आधुनिक टर्मिनल और अन्य सुविधाएं मौजूद होने के बावजूद यहां से सीमित उड़ानें संचालित हो रही हैं। इससे न केवल यात्रियों को असुविधा हो रही है, बल्कि क्षेत्र के व्यापार और पर्यटन पर भी असर पड़ रहा है।
नीतियों का लाभ नहीं मिलने का आरोप
अदालत में यह भी कहा गया कि छोटे और मध्यम शहरों को हवाई नेटवर्क से जोड़ने के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर कई नीतियां बनाई गई हैं। मध्यप्रदेश एविएशन पॉलिसी लागू होने के बाद भी ग्वालियर को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने नगर निगम के खाते में 25 हजार रुपये जमा करने की सहमति दी। राशि जमा करने के बाद कोर्ट ने याचिका को औपचारिक रूप से स्वीकार करते हुए सभी संबंधित पक्षों से निर्धारित समय में जवाब मांगा है। अब इस मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।
