भोपाल में MP जनजातीय संग्रहालय में 28 फरवरी तक शलाका चित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। यह प्रदर्शनी विशेष रूप से गौंड समुदाय के चित्रकार कुम्हार सिंह धुर्वे के अद्वितीय चित्रों को दर्शकों के सामने लाती है।
डिंडौरी के पाटनगढ़ निवासी कुम्हार सिंह धुर्वे ने अपनी चित्रकला की शुरुआत अपने बच्चों के साथ सीखते हुए की। धीरे-धीरे उन्होंने जनजातीय जीवन और प्रकृति को चित्रों के माध्यम से अभिव्यक्त करते हुए एक अलग पहचान बनाई।
MP जनजातीय संग्रहालय
धुर्वे के चित्रों में पशु-पक्षी, जंगल और पहाड़ी जीवन की झलक देखने को मिलती है। उनके चित्रों में खेती-किसानी से जुड़े जीवन के विभिन्न पहलू भी उजागर होते हैं। चित्रों में स्थानीय जीवन और परंपराओं का प्राकृतिक रूप से चित्रण दर्शकों को गांव और जंगल की नजाकत का अनुभव कराता है।
बिक्री के लिए उपलब्ध
प्रदर्शनी में प्रदर्शित चित्र न केवल देखने के लिए हैं, बल्कि बिक्री के लिए भी उपलब्ध हैं। यह पहल स्थानीय कलाकारों को आर्थिक सहायता प्रदान करने के साथ-साथ उनकी कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में मदद करती है। इस प्रदर्शनी का महत्व केवल कला तक सीमित नहीं है। यह बच्चों, छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए जनजातीय जीवन, उनकी सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय पारंपरिक कला को समझने का अवसर भी प्रदान करती है।
आगंतुकों के लिए जानकारी
प्रदर्शनी हर दिन सुबह से शाम तक खुली रहेगी। कला प्रेमियों और सांस्कृतिक जानकारों से अपेक्षा है कि वे इस प्रदर्शनी का दौरा करें और स्थानीय कला और संस्कृति का अनुभव लें। आयोजक उम्मीद कर रहे हैं कि इस तरह की प्रदर्शनी नियमित रूप से आयोजित की जाए। इससे स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहन मिलेगा और जनजातीय कला के संरक्षण और प्रचार में मदद मिलेगी।
