प्रधानमंत्री उषा योजना के अंतर्गत रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस एवं कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इस सम्मेलन में देश-विदेश से आए वैज्ञानिक और शोधकर्ता विभिन्न समसामयिक वैज्ञानिक विषयों पर अपने शोध निष्कर्ष और अनुभव साझा कर रहे हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों और शोधार्थियों को वैश्विक स्तर की वैज्ञानिक सोच और नवीनतम अनुसंधान से जोड़ना है।
कॉन्फ्रेंस के दौरान यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड से आए प्रोफेसर हेमदत्त शुक्ला ने कैंसर अनुसंधान पर विस्तृत व्याख्यान दिया। वे विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र भी रहे हैं, जिससे कार्यक्रम में उनका संबोधन विशेष महत्व रखता था। उन्होंने पैंक्रियाटिक कैंसर पर अपने शोध कार्य, विकसित प्रोटोटाइप और पेटेंट उपलब्धियों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि कैंसर के जटिल मामलों में शुरुआती पहचान और लक्षित उपचार पद्धतियां भविष्य में अहम भूमिका निभाएंगी। उनके व्याख्यान के दौरान छात्रों ने शोध की प्रक्रिया और क्लिनिकल ट्रायल से जुड़े सवाल भी पूछे।
रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय
प्रोफेसर शुक्ला ने आधुनिक तकनीकों और बायोमॉलिक्यूलर रिसर्च के माध्यम से कैंसर उपचार के नए आयामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बहु-विषयक शोध से ही जटिल बीमारियों का प्रभावी समाधान संभव है। उनके प्रस्तुतीकरण में डेटा आधारित विश्लेषण और प्रयोगशाला के अनुभवों की झलक भी देखने को मिली, जिससे शोधार्थियों को व्यावहारिक समझ विकसित करने में मदद मिली।
संस्कृति और पौधों की भूमिका
इसी क्रम में श्रीलंका के कोलंबो से आईं डॉ. चंद्रकांता ने प्लांट साइंस विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने भारतीय शाकाहारी संस्कृति में उपयोग होने वाले पौधों की उपयोगिता, उनकी सुरक्षा और पोषण संबंधी महत्व को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि पारंपरिक आहार प्रणाली में शामिल कई पौधे औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं और आधुनिक विज्ञान भी अब इनकी उपयोगिता को स्वीकार कर रहा है।
छात्रों में उत्साह
सम्मेलन के दौरान विद्यार्थियों और विशेषज्ञों के बीच खुला संवाद देखने को मिला। शोधार्थियों ने अपने प्रोजेक्ट्स साझा किए और विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त किया। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इस तरह के आयोजन न केवल अकादमिक वातावरण को समृद्ध करते हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए रास्ते भी खोलते हैं।
