,

जबलपुर में हृदय रोग से पीड़ित बच्चों के लिए विशेष जांच शिविर, 100 से अधिक का हुआ परीक्षण

Author Picture
Published On: 28 February 2026

स्वास्थ्य विभाग के तत्वावधान में शुक्रवार को जबलपुर के ज्वाइंट डायरेक्टर हेल्थ ऑफिस परिसर में हृदय रोग से पीड़ित बच्चों के लिए विशेष जांच शिविर आयोजित किया गया। इस कैंप में कटनी, सिवनी, बालाघाट सहित आसपास के जिलों से बच्चों को परीक्षण के लिए लाया गया। शिविर का उद्देश्य जन्मजात हृदय रोग से जूझ रहे बच्चों की समय पर पहचान और उपचार सुनिश्चित करना था।

शिविर में नारायणा हॉस्पिटल के सीनियर पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सुप्रीतम सेन ने 100 से अधिक बच्चों की जांच की। इनमें वे बच्चे भी शामिल थे, जिनकी पहले दिल में छेद की सर्जरी हो चुकी है और जिनका फॉलो-अप आवश्यक था। विशेषज्ञ जांच के दौरान बच्चों की वर्तमान स्थिति का आकलन किया गया और आगे की चिकित्सा जरूरतों पर परिजनों को परामर्श दिया गया।

जबलपुर में हृदय रोग

जानकारी के अनुसार, जबलपुर जिले के 242 बच्चों का मुंबई स्थित नारायणा हॉस्पिटल में सफल ऑपरेशन किया जा चुका है। इन बच्चों के दिल में जन्मजात छेद की समस्या थी। ऑपरेशन के बाद सभी बच्चे स्वस्थ जीवन जी रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि ऐसे शिविरों से गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान संभव हो पाती है, जिससे इलाज आसान और प्रभावी बनता है।

एक हफ्ते पहले से शुरू हुई थी तैयारी

शिविर की तैयारी स्वास्थ्य विभाग ने लगभग एक सप्ताह पहले शुरू कर दी थी। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत 40 से अधिक डॉक्टरों की टीम ने आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में जाकर बच्चों की स्क्रीनिंग की। जिन बच्चों में हृदय संबंधी समस्या की आशंका मिली, उन्हें सूचीबद्ध कर परिजनों सहित कैंप में बुलाया गया।

आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत

आरबीएसके की डॉक्टर डॉ. नाजिया ने बताया कि 0 से 6 वर्ष तक के बच्चों की जांच आंगनबाड़ी केंद्रों में और 7 से 18 वर्ष तक के बच्चों की स्क्रीनिंग स्कूलों में की जाती है। उन्होंने कहा कि अधिकतर बच्चे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से होते हैं, जिनके लिए महंगा इलाज कराना संभव नहीं होता। ऐसे मामलों में बच्चों की पूरी मेडिकल हिस्ट्री तैयार कर आरबीएसके के माध्यम से लाखों रुपये तक का निशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जन्मजात हृदय रोग की समय रहते पहचान हो जाए तो बच्चों को सामान्य जीवन देने में सफलता मिलती है। इस तरह के शिविर न केवल उपचार का माध्यम बनते हैं, बल्कि जागरूकता फैलाने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।

Related News
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp