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उज्जैन में 28 फरवरी से एचपीवी टीकाकरण अभियान, 14-15 वर्ष की किशोरियों को लगेगा सर्वाइकल कैंसर रोधी टीका

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Published On: 28 February 2026

उज्जैन जिले में 28 फरवरी से किशोरी बालिकाओं के लिए विशेष टीकाकरण अभियान शुरू किया जा रहा है। इस अभियान के तहत 14 से 15 वर्ष आयु वर्ग की बालिकाओं को एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) का टीका लगाया जाएगा, जिससे सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाव संभव हो सकेगा। स्वास्थ्य विभाग ने इसे बालिकाओं के स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अशोक कुमार पटेल ने बताया कि प्रदेशभर में यह टीकाकरण अभियान 28 फरवरी से प्रारंभ होकर तीन माह तक चलेगा। शुरुआती चरण में 14 से 15 वर्ष आयु की सभी पात्र किशोरियों को कवर करने का लक्ष्य रखा गया है। विभाग ने संबंधित अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को आवश्यक तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं।

उज्जैन में एचपीवी टीकाकरण अभियान

पहले चरण में जिला चिकित्सालय, मेडिकल कॉलेज, सिविल अस्पताल और चयनित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) को फोकल प्वाइंट बनाया गया है। इन केंद्रों पर निर्धारित तिथियों में टीकाकरण सत्र आयोजित किए जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग की टीमों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी पात्र बालिका को टीके से वंचित न रहना पड़े।

उम्र सत्यापन के लिए दस्तावेज जरूरी

टीकाकरण के दौरान माता-पिता या अभिभावकों को अपनी बेटी की उम्र से संबंधित प्रमाण साथ लाना होगा। बर्थ सर्टिफिकेट, आधार कार्ड या स्कूल आईडी जैसे वैध दस्तावेज प्रस्तुत कर आयु सत्यापन कराया जा सकेगा। विभाग का कहना है कि सही आयु वर्ग की पहचान के लिए दस्तावेज अनिवार्य होंगे।

क्यों जरूरी है एचपीवी टीका

चिकित्सकों के अनुसार सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाले प्रमुख कैंसरों में से एक है। एचपीवी वायरस इसके मुख्य कारणों में शामिल है। समय पर टीकाकरण से इस संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि किशोरावस्था में दिया गया टीका भविष्य में गंभीर बीमारी से सुरक्षा प्रदान करता है।

स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अभियान में सक्रिय सहयोग करें और निर्धारित तिथियों पर अपनी बेटियों को टीकाकरण केंद्र तक लेकर आएं। साथ ही स्कूलों और आंगनबाड़ी स्तर पर भी जागरूकता गतिविधियां संचालित की जाएंगी, ताकि अधिक से अधिक बालिकाएं इस अभियान का लाभ उठा सकें।

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