छावा को लेकर ए. आर. रहमान की दो टूक, बोले- “यह फिल्म लोगों को बांटती है”

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Published On: 17 January 2026

साल 2025 की शुरुआत में रिलीज हुई विक्की कौशल की फिल्म ‘छावा’ ने थिएटर्स में आते ही जबरदस्त रिकॉर्ड बना दिए। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म को दर्शकों का भरपूर प्यार मिला और यह साल की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में गिनी जाने लगी। लेकिन जितनी तेजी से फिल्म ने कमाई की, उतनी ही तेजी से यह विवादों में भी घिर गई।

मराठा योद्धा छत्रपति संभाजी महाराज और मुगल शासक औरंगजेब के चित्रण को लेकर फिल्म पर सवाल उठे। कुछ लोगों ने इसे इतिहास का साहसिक चित्रण बताया, तो कुछ ने इसे भावनाओं को भड़काने वाली फिल्म करार दिया।

महाराष्ट्र में क्यों भड़का विवाद?

फिल्म की रिलीज के बाद महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में तनाव की स्थिति देखने को मिली। नागपुर समेत कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन हुए और माहौल गर्म हो गया। उस समय राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी माना था कि फिल्म में औरंगजेब के चित्रण को लेकर लोगों में नाराजगी थी, जिसने हालात बिगाड़े। हालांकि, कई दर्शकों का मानना था कि फिल्म का मकसद किसी समुदाय को निशाना बनाना नहीं, बल्कि मराठा वीरता को दिखाना था।

बना चर्चा का कारण

अब, फिल्म रिलीज के काफी समय बाद, ‘छावा’ के म्यूजिक कंपोजर ए. आर. रहमान के बयान ने एक बार फिर इस बहस को हवा दे दी है। बीबीसी एशियन नेटवर्क को दिए इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि क्या ‘छावा’ एक बांटने वाली फिल्म है, तो रहमान ने बिना झिझक जवाब दिया कि “हां, यह फिल्म लोगों को बांटती है।” हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि फिल्म का इरादा बहादुरी और इतिहास को दिखाने का था, न कि नफरत फैलाने का।

रहमान का साफ संदेश

ए. आर. रहमान ने कहा कि दर्शकों को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, लोगों के अंदर समझ होती है कि क्या सच्चाई है और क्या चालबाजी। उन्होंने यह भी कहा कि हर फिल्म का असर दर्शक के विवेक पर निर्भर करता है। रहमान ने यह बात भी जोड़ी कि ‘छावा’ मराठा समाज के लिए भावनात्मक महत्व रखती है और यही वजह है कि यह इतनी ज्यादा सेलिब्रेट की गई। फिल्म का संगीत तैयार करने पर उन्हें गर्व है, क्योंकि यह “मराठा आत्मा की धड़कन” को दर्शाता है।

अपने बयान में रहमान ने यह भी कहा कि वे उन फिल्मों से दूर रहना पसंद करते हैं, जिनकी नीयत समाज को गलत दिशा में ले जाने की हो। उनका मानना है कि कला का मकसद जोड़ना होना चाहिए, तोड़ना नहीं।

दर्द किया साझा

इसी बातचीत के दौरान ए. आर. रहमान ने एक और चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने कहा कि बीते करीब आठ सालों से उन्हें बॉलीवुड में ज्यादा काम नहीं मिला है। इसके पीछे उन्होंने इंडस्ट्री की अंदरूनी राजनीति को जिम्मेदार ठहराया। रहमान ने यह बात बिना किसी आरोप के, लेकिन बेहद सधे हुए अंदाज में कही, जिसने इंडस्ट्री के कामकाज पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए।

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