बॉलीवुड में अक्सर ऐसा माना जाता है कि अगर कोई स्टार किड है तो उसके लिए रास्ते अपने आप आसान हो जाते हैं। लेकिन हकीकत हर बार इतनी (बॉबी देओल) सीधी नहीं होती। कुछ कलाकार ऐसे भी रहे हैं, जिन्हें नाम, पहचान और बड़े बैनर मिलने के बावजूद लंबे समय तक संघर्ष से गुजरना पड़ा। ऐसी ही एक कहानी है बॉबी देओल की, जिन्होंने शोहरत भी देखी और गुमनामी के दिन भी।
शानदार शुरुआत
बॉबी देओल ने साल 1995 में फिल्म ‘बरसात’ से बॉलीवुड में बतौर लीड एक्टर कदम रखा था। फिल्म ने ठीक-ठाक प्रदर्शन किया और बॉबी को इंडस्ट्री में पहचान मिल गई। इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक कई हिट फिल्में दीं और देओल परिवार की फिल्मी विरासत को आगे बढ़ाया।
उनके पिता धर्मेंद्र, बड़े भाई सनी देओल और सौतेली मां हेमा मालिनी सभी हिंदी सिनेमा के बड़े नाम रहे हैं। ऐसे में बॉबी से भी काफी उम्मीदें थीं। लेकिन वक्त हमेशा एक जैसा नहीं रहता।
तरस गए बॉबी देओल
साल 2013 के बाद बॉबी देओल का करियर लगभग थम सा गया। हैरानी की बात यह थी कि करीब चार साल तक उनके पास कोई ठोस काम नहीं था। एक वक्त ऐसा भी आया जब वह घर पर खाली बैठे थे और फिल्मों से पूरी तरह कट चुके थे। यह दौर किसी भी कलाकार के लिए मानसिक रूप से बेहद कठिन होता है, खासकर तब जब आप एक सुपरस्टार परिवार से आते हों और लोग आपसे लगातार सवाल पूछते हों।
सलमान खान से मिली उम्मीद
कई साल के इंतजार के बाद सलमान खान ने बॉबी देओल को ‘रेस 3’ में मौका दिया। इससे उम्मीद जगी कि बॉबी की गाड़ी फिर से पटरी पर लौटेगी। हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं दिखा सकी और बॉबी का करियर भी वहां से उड़ान नहीं भर पाया। लेकिन यहीं से बॉबी ने हार मानने के बजाय खुद को नए सिरे से ढालने का फैसला किया।
ओटीटी बना टर्निंग पॉइंट
बॉबी देओल के करियर का असली मोड़ आया ओटीटी प्लेटफॉर्म से। वेब सीरीज ‘आश्रम’ में उनका किरदार बाबा निराला दर्शकों के बीच जबरदस्त हिट साबित हुआ। इस रोल में बॉबी का नेगेटिव अंदाज़ इतना असरदार था कि लोग उन्हें एक बिल्कुल नए अवतार में देखने लगे। इसके बाद उन्होंने ‘लव हॉस्टल’ और ‘क्लास ऑफ 83’ जैसे प्रोजेक्ट्स किए, जहां उनकी एक्टिंग को खूब सराहा गया।
बॉबी देओल बड़े पर्दे पर एक यादगार वापसी की तलाश में थे, जो पूरी हुई साल 2023 में आई रणबीर कपूर की फिल्म ‘एनिमल’ से। इस फिल्म में बॉबी ने अबरार हक का किरदार निभाया और कम स्क्रीन टाइम के बावजूद गहरी छाप छोड़ दी। उनका यह नेगेटिव रोल फिल्म की सबसे ज्यादा चर्चित चीज़ों में से एक बन गया। इसी के साथ बॉबी देओल ने यह साबित कर दिया कि उम्र सिर्फ एक नंबर है।
53 की उम्र में नई पहचान
53 साल की उम्र में बॉबी देओल ने जो कमबैक किया, वह हर उस इंसान के लिए प्रेरणा है जो मुश्किल वक्त में खुद पर भरोसा खो देता है। उनकी कहानी बताती है कि सही मौका, मेहनत और धैर्य से कोई भी दोबारा खड़ा हो सकता है।
