मदरहुड के बाद Deepika Padukone का 8 घंटे शिफ्ट का मुद्दा तेजी से चर्चा में है। एक्ट्रेस ने साफ कहा कि इंडस्ट्री में ओवरवर्क को कमिटमेंट समझ लिया गया है, जबकि असलियत में स्वस्थ दिमाग और शरीर के लिए सीमित समय तक काम करना जरूरी है। उनके इस बयान ने काम-काज कल्चर पर नई बहस छेड़ दी है।
दीपिका पादुकोण ने इंडस्ट्री में चल रही लंबी वर्किंग शिफ्ट पर खुलकर बात की है। उन्होंने कहा कि मां बनने के बाद काम और निजी जिंदगी के बीच बैलेंस बनाना महत्वपूर्ण है, और 8 घंटे की शिफ्ट उनके लिए एक जरूरत है, कोई डिमांड नहीं। स्पिरिट और कल्कि 2898 AD से बाहर होने के बाद उनके बयान ने वर्क कल्चर पर नई बहस शुरू कर दी है।
हार्पर बाजार को दिए इंटरव्यू में दीपिका ने कहा कि लोग ओवरवर्क को नॉर्मल मानने लगे हैं, जबकि यह सीधे हेल्थ और परफॉर्मेंस को प्रभावित करता है। उन्होंने बताया कि एक्ट्रेस होने के साथ-साथ वह अब एक मां भी हैं, और दोनों जिम्मेदारियों के साथ न्याय करने के लिए उन्हें लिमिटेड शिफ्ट की जरूरत पड़ती है। दीपिका के मुताबिक, नई मांओं को काम पर लौटने पर सपोर्ट मिलना चाहिए, ताकि वे बिना तनाव के अपना बेस्ट दे सकें। उनके इस बयान को कई लोग इंडस्ट्री में एक जरूरी बदलाव की शुरुआत मान रहे हैं।
Deepika Padukone का बयान
दीपिका के 8 घंटे शिफ्ट वाले स्टैंड ने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में वर्क टाइमिंग पर नई बहस छेड़ दी है। लंबे समय से फिल्मों की शूटिंग में 12-14 घंटे तक काम करना आम माना जाता रहा है, लेकिन दीपिका ने इस सिस्टम को चुनौती दी है। उनका कहना है कि किसी भी इंसान के शरीर और दिमाग की क्षमता सीमित होती है, और जब तक क्रू मेंबर्स व एक्टर्स को हेल्दी एनवायरनमेंट नहीं मिलेगा, तब तक वे अपना बेस्ट नहीं दे पाएंगे। उन्होंने यह भी बताया कि उनके अपने ऑफिस में सोमवार से शुक्रवार तक सिर्फ 8 घंटे का काम होता है। यहां मदरहुड और फादरहुड को लेकर भी स्पष्ट पॉलिसी है, ताकि टीम के लोग अपनी निजी जिंदगी भी आसानी से संभाल सकें। इससे काम की क्वालिटी बेहतर होती है और टीम पर अनावश्यक दबाव नहीं बनता। दीपिका के इस मॉडल को कई लोग एक सकारात्मक उदाहरण मान रहे हैं।
वर्क कल्चर पर गंभीर चर्चा
दीपिका पादुकोण के बयान के बाद फिल्म इंडस्ट्री में वर्क कल्चर पर गंभीर चर्चा शुरू हो गई है। कई एक्टर्स पहले भी शूटिंग के वक्त लंबी शिफ्ट और नींद की कमी की बात कह चुके हैं, लेकिन इसे कभी ओपन डिबेट का रूप नहीं मिला। दीपिका ने पहली बार इस मुद्दे पर खुलकर बात की है और कहा कि बर्नआउट को कमिटमेंट समझना गलत है। उन्होंने साफ कहा कि बर्नआउट से जूझ रहे इंसान को वापस काम पर लाना किसी के लिए फायदेमंद नहीं होता। लिमिटेड शिफ्ट से न सिर्फ हेल्थ बेहतर रहती है बल्कि क्रिएटिविटी भी मजबूत होती है। उनके बयान के बाद कई इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स ने भी माना कि काम का यह मॉडल आने वाले समय में फिल्म इंडस्ट्री को एक हेल्दी दिशा दे सकता है। स्पिरिट और कल्कि 2898 AD से बाहर होने के बाद दीपिका अब शाहरुख खान की “किंग” और अल्लू अर्जुन की अगली फिल्म में नजर आएंगी।
