जेल से लौटे राजपाल यादव, बाहर आते ही उठाई सुधार की मांग

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Published On: 19 February 2026

हिंदी फिल्मों में अपनी कॉमिक टाइमिंग से लोगों को हंसाने वाले राजपाल यादव पिछले कुछ दिनों से एक अलग वजह से चर्चा में रहे। 16 साल पुराने चेक बाउंस मामले में उन्हें 10 दिन तिहाड़ जेल में रहना पड़ा। अब जमानत मिलने के बाद वह बाहर आ चुके हैं और बाहर आते ही उन्होंने जो कहा, उसने लोगों का ध्यान खींच लिया।

राजपाल ने सिर्फ अपनी कानूनी लड़ाई की बात नहीं की, बल्कि जेल व्यवस्था पर भी खुलकर राय रखी। उन्होंने कहा कि कानून सबके लिए बराबर है और अगर कोई नहीं बदलता तो उसे सजा जरूर मिलनी चाहिए। लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि जेलों में सुधार की जरूरत है और कुछ कैदियों को सुधार का मौका मिलना चाहिए।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, यह मामला 16 साल पुराना है, जिसमें चेक बाउंस से जुड़ा विवाद था। बताया जा रहा है कि उन पर करीब 9 करोड़ रुपये का कर्ज है। हाल ही में उन्होंने लगभग ढाई करोड़ रुपये जमा कर दिए, जिसके बाद उन्हें जमानत मिल पाई। बाकी रकम उन्हें मार्च तक चुकानी है।

कानूनी प्रक्रिया अपनी जगह चल रही है, लेकिन जेल से बाहर आने के बाद उनका फोकस सिर्फ अपने केस पर नहीं रहा। उन्होंने जेल में बिताए गए दिनों के अनुभव साझा किए और सिस्टम में बदलाव की बात कही।

“जेलों को समय के साथ बदलना होगा”

राजपाल यादव का कहना है कि आज के दौर के हिसाब से जेलों को अपग्रेड करना जरूरी है। उन्होंने महसूस किया कि कई कैदी ऐसे हैं जो सालों से कोर्ट के चक्कर लगा रहे हैं। कुछ तो ऐसे भी हैं जिन्हें सजा हो चुकी है, फिर भी प्रक्रिया लंबी खिंचती जा रही है।

उनका मानना है कि कैदियों के व्यवहार और उनके सुधार पर भी ध्यान देना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति सच में बदलना चाहता है, तो उसे एक मौका मिलना चाहिए। उनका कहना था कि समाज में इज्जतदार इंसान और कैदी के बीच फर्क तो होता है, लेकिन हर कैदी हमेशा के लिए गलत नहीं होता।

“हर कैदी को एक लाइफलाइन मिलनी चाहिए”

राजपाल ने एक दिलचस्प तुलना भी की। उन्होंने कहा कि जैसे टीवी शो में लाइफलाइन मिलती है, वैसे ही जेल में कम से कम 10% कैदियों को सुधार का एक मौका मिलना चाहिए। अगर उनमें से कुछ लोगों को रिहा करके सही तरीके से पुनर्वास दिया जाए, तो वे समाज के लिए बोझ नहीं, बल्कि ताकत बन सकते हैं।

हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि अगर कोई सुधार का फायदा नहीं उठाता, तो कानून अपना काम करता है। उनका सीधा संदेश था कानून किसी को नहीं बख्शता।

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