फिल्म ‘धुरंधर’ इन दिनों लगातार चर्चा में बनी हुई है। कभी इसके दमदार किरदारों की वजह से, तो कभी तगड़े डायलॉग्स और बैकग्राउंड म्यूजिक के कारण। लेकिन इन सबके बीच एक चीज़ है जिसने थिएटर में बैठे दर्शकों को सबसे ज्यादा जोश से भर दिया संजय दत्त की एंट्री पर बजने वाला गाना ‘हवा हवा’। जैसे ही यह गाना शुरू होता है, सीटियों और तालियों की आवाज़ अपने आप गूंजने लगती है।
हालांकि बहुत कम लोग जानते हैं कि यह गाना सिर्फ एक एंट्री सॉन्ग नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक लंबा और दिलचस्प इतिहास छुपा हुआ है, जो करीब पांच दशक पुराना है और जिसमें बैन, राजनीति, संगीत और क्रांति सब कुछ शामिल है।
धुरंधर में गूंजा ‘हवा हवा
अक्सर लोगों को लगता है कि ‘हवा हवा’ कोई नया या हालिया गाना है, लेकिन असल सच्चाई यह है कि इसकी जड़ें करीब 55 साल पहले तक जाती हैं। यह गाना पहली बार 1970 के आसपास सामने आया था। उस दौर में यह धुन अपने आप में काफी अलग थी न तो पूरी तरह ट्रेडिशनल और न ही पूरी तरह वेस्टर्न। दिलचस्प बात यह है कि ‘हवा हवा’ को लोग आमतौर पर पाकिस्तानी गाना मानते हैं, लेकिन इसकी असली शुरुआत ईरान (फारस) से हुई थी। इसे सबसे पहले मशहूर ईरानी सिंगर कोरोश यागमई ने गाया था। गाने का नाम था ‘हवार हवार’। उस समय कोरोश ने लोक धुनों को रॉक और मॉडर्न म्यूजिक के साथ मिलाकर कुछ नया करने की कोशिश की थी। यह एक्सपेरिमेंट लोगों को इतना पसंद आया कि गाना ईरान में देखते ही देखते हिट हो गया। युवा वर्ग इसे खूब सुनने लगा और यह उस दौर का ट्रेंड बन गया।
जब गाने पर लगा ताला
लेकिन साल 1979 में ईरान में इस्लामिक रिवोल्यूशन हुआ और उसके बाद हालात पूरी तरह बदल गए। नई सरकार के आने के बाद रॉक और मॉडर्न म्यूजिक को गलत माना गया। नतीजा यह हुआ कि कोरोश यागमई के गाने, जिनमें ‘हवार हवार’ भी शामिल था, पूरी तरह बैन कर दिए गए। रेडियो पर इसे बजाना मना हो गया, कैसेट्स पर रोक लग गई और यह गाना अचानक गायब सा हो गया। सिर्फ ईरान ही नहीं, बल्कि कई दूसरे देशों में भी इसे लेकर सख्ती बरती जाने लगी।
पाकिस्तान से मिली नई पहचान
कुछ साल बाद, 1980 के दशक में, इस धुन को पाकिस्तानी सिंगर हसन जहांगीर ने सुना। उन्हें यह मेलोडी इतनी पसंद आई कि उन्होंने इसे अपने अंदाज में रीक्रिएट किया और नाम दिया ‘हवा हवा’। बस यहीं से इस गाने की किस्मत बदल गई। यह गाना पाकिस्तान में सुपरहिट हुआ और फिर धीरे-धीरे पूरे साउथ एशिया में फैल गया। शादी-ब्याह, पार्टियों और रेडियो हर जगह यही गाना बजने लगा। कहते हैं कि उस दौर में इसकी करोड़ों-अरबों कॉपियां बिकीं और यह पॉप कल्चर का हिस्सा बन गया।
अब जब ‘धुरंधर’ में इसी गाने को संजय दत्त की एंट्री के साथ दिखाया गया, तो यह सिर्फ म्यूजिक नहीं, बल्कि एक एहसास बन गया। भारी-भरकम स्क्रीन प्रेजेंस, पुरानी यादों से जुड़ा गाना और थिएटर का माहौल तीनों मिलकर सीन को यादगार बना देते हैं। शायद यही वजह है कि दर्शकों को यह गाना आज भी उतना ही फ्रेश लगता है, जितना दशकों पहले लगता था।
समय बदल गया
‘हवा हवा’ उन गानों में से है जो समय, सरहद और राजनीति से ऊपर उठकर लोगों के दिलों में जगह बना लेते हैं। कभी बैन हुआ, कभी गुमनाम हुआ, और आज फिर से बड़े पर्दे पर धमाल मचा रहा है।
