नॉर्थ वजीरिस्तान में मदरसे पर हुआ बम धमाका, 2 की मौत; जांच जारी

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Published On: 12 December 2025

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में आतंकवाद और कानून-व्यवस्था की कमजोर स्थिति एक बार फिर उजागर हो गई है। देर रात नॉर्थ वजीरिस्तान जिले के एक मदरसे में हुए भीषण बम धमाके ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया। इस विस्फोट में दो मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई, जिसके बाद स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई और सुरक्षा एजेंसियों पर सवाल खड़े हो गए हैं। घटना के बाद सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर जांच शुरू कर दी है, जबकि लोग लगातार बढ़ती हिंसा और आतंकवादी घटनाओं को लेकर चिंता व्यक्त कर रहे हैं।

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में आतंकवाद और कानून-व्यवस्था की कमजोर स्थिति एक बार फिर उजागर हो गई है। देर रात नॉर्थ वजीरिस्तान जिले के एक मदरसे में हुए भीषण बम धमाके में दो मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई, जिससे पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई है।

नॉर्थ वजीरिस्तान में हुआ बम हमला

खैबर पख्तूनख्वा के नॉर्थ वजीरिस्तान जिले में स्थित खुशहाली गांव के अयाज़ कोट इलाके के एक मदरसे में अज्ञात हमलावरों द्वारा लगाए गए शक्तिशाली बम के फटने से इमारत पूरी तरह ढह गई और आसपास अफरा-तफरी मच गई। इस भयावह विस्फोट में दो मासूम बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि आठ अन्य बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है।

पुलिस ने शुरू की जांच

मदरसे में हुए भयावह धमाके के बाद स्थानीय पुलिस ने जांच तेज़ी से शुरू कर दी है। फिलहाल किसी भी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे प्रतिबंधित आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) की भूमिका हो सकती है। बताया जाता है कि टीटीपी पहले भी खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र में इसी तरह के हमले अंजाम देता रहा है, इसलिए शक की सुई उसी ओर घूम रही है।

600 बच्चों का भविष्य अधर में

नॉर्थ वज़ीरिस्तान के अयाज़ कोट इलाके में हुए भीषण धमाके का सबसे दर्दनाक असर वहां पढ़ने वाले 600 बच्चों पर पड़ा है। धमाके में मदरसा पूरी तरह तबाह हो गया, जो इस क्षेत्र में एकमात्र शिक्षण संस्थान था। स्थानीय लोगों के अनुसार अब इन बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह अधर में लटक गई है। सुरक्षा पर खतरे के साथ-साथ यह घटना बच्चों के शिक्षा के अधिकार पर भी गहरा आघात है, क्योंकि फिलहाल उनके लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध नहीं है।

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