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अटलांटिक में ताकत का आमना-सामना: रूसी तेल टैंकर पर अमेरिकी कब्ज़ा, वॉशिंगटन-मॉस्को टकराव और गहराया

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Published On: 8 January 2026

अटलांटिक महासागर में उस वक्त अंतरराष्ट्रीय हलचल तेज हो गई, जब वेनेजुएला से रवाना हुए रूसी तेल टैंकर बेला-1 को अमेरिकी नौसेना ने अपने नियंत्रण में ले लिया। यह कार्रवाई खुले समुद्र में की गई, जिससे अमेरिका और रूस के बीच पहले से जारी तनाव में एक नया और खतरनाक अध्याय जुड़ गया। बताया जा रहा है कि अमेरिका ने यह कदम वेनेजुएला के तेल निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों और समुद्री नाकाबंदी के तहत उठाया। अमेरिकी प्रशासन लंबे समय से वेनेजुएला से जुड़े तेल व्यापार को अवैध बताते हुए उसे रोकने की कोशिश करता रहा है। बेला-1 को उसी नीति के तहत रोका जाना माना जा रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी वायु सेना के हेलीकॉप्टर से विशेष दस्ते के जवान सीधे टैंकर के डेक पर उतरे। कुछ ही समय में पूरे जहाज को अमेरिकी नौसेना ने अपने कब्ज़े में ले लिया। यह ऑपरेशन इतनी तेजी से अंजाम दिया गया कि टैंकर पर मौजूद चालक दल को प्रतिक्रिया का मौका तक नहीं मिला।

रूसी सुरक्षा घेरा भी रहा बेअसर

इस घटना से पहले रूस ने अपने तेल टैंकर की सुरक्षा के लिए अटलांटिक महासागर में सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी थी। जानकारी सामने आई है कि टैंकर के आसपास एक परमाणु पनडुब्बी और अन्य रूसी नौसैनिक जहाज तैनात किए गए थे। इसके बावजूद अमेरिका की इस कार्रवाई को रोका नहीं जा सका, जो रूस के लिए बड़ा रणनीतिक झटका माना जा रहा है। समुद्री जानकारों का मानना है कि यह घटना केवल एक जहाज की जब्ती नहीं है, बल्कि वैश्विक समुद्री सुरक्षा के लिए चेतावनी है। जिस तरह दो महाशक्तियों की सेनाएं आमने-सामने आईं, उससे किसी भी गलत कदम पर सीधी सैन्य टकराव की आशंका बढ़ गई थी।

मॉस्को में नाराज़गी

रूस की ओर से इस कार्रवाई को उकसावे वाली बताया जा रहा है, जबकि अमेरिका इसे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के पालन की कार्रवाई बता रहा है। दोनों देशों के रुख से साफ है कि यह मामला जल्द शांत होने वाला नहीं है। बेला-1 की जब्ती ने यह साफ कर दिया है कि तेल और प्रतिबंधों की राजनीति अब समुद्र तक खुलकर उतर चुकी है। आने वाले दिनों में यह घटना अमेरिका-रूस संबंधों के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री संतुलन पर भी गहरा असर डाल सकती है।

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