India-EU FTA Explained: वैश्विक व्यापार के क्षेत्र में भारत और यूरोपीय संघ (EU) ऐतिहासिक साझेदारी की ओर बढ़ रहे हैं। 27 जनवरी 2026 को होने वाले इस Free Trade Agreement को “Mother of All Deals” कहा जा रहा है। इस समझौते के लागू होने के बाद भारत में यूरोपीय कारों, विशेषकर मर्सिडीज, बीएमडब्ल्यू और फॉक्सवेगन पर लगने वाला भारी टैक्स काफी कम हो जाएगा। दोनों पक्षों के बीच व्यापारिक और निवेश के अवसर भी बढ़ेंगे।
भारत और यूरोपीय संघ (EU) वैश्विक व्यापार के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम लेने जा रहे हैं। आज दोनों के बीच Free Trade Agreement (FTA) पर हस्ताक्षर होने वाले हैं, जिसे “Mother of All Deals” कहा जा रहा है। इस समझौते के लागू होने के बाद भारत में यूरोपीय कारों, विशेषकर मर्सिडीज और अन्य ब्रांडों के आयात में तेजी आएगी।
India-EU FTA Explained
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच होने वाली अहम व्यापार डील का फैसला 27 जनवरी को ऐतिहासिक रूप से लिया जाएगा। इसे “Mother of All Deals” कहा जा रहा है और इसके लागू होने से दोनों पक्षों के बीच व्यापार और निवेश के अवसरों में बड़ा इजाफा होने की उम्मीद है। यह डील न केवल आर्थिक सहयोग को मजबूत करेगी बल्कि भारत और EU के बीच रणनीतिक साझेदारी को भी नई ऊँचाइयों पर ले जाएगी।
आयातित कारों पर टैक्स हुआ कम
भारत में आयातित कारों पर लागू 110% तक के उच्च टैरिफ को जल्द ही घटाकर 40% किए जाने की संभावना है। इसके अलावा, अगले कुछ वर्षों में इसे और कम कर 10% तक लाने का लक्ष्य रखा गया है। इस कदम से भारतीय ग्राहकों के लिए लग्जरी कारें किफायती होंगी और यूरोपीय कंपनियों के लिए दुनिया के तीसरे सबसे बड़े ऑटो बाजार में प्रवेश आसान होगा।
भारत और EU की बढ़ी नजदीकी
अमेरिका और यूरोप के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारत और यूरोपीय संघ (EU) की नजदीकी नई वैश्विक व्यापार राजनीति में महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड विवाद के बाद यूरोपीय देशों पर दबाव बढ़ाया और फरवरी से आठ EU देशों पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी दी, जिससे यूरोप ने फिलहाल अमेरिका के साथ अपनी ट्रेड डील को रोक दिया है। ऐसे समय में भारत और EU के बीच बढ़ते संबंध वैश्विक व्यापार संतुलन को नए सिरे से आकार दे सकते हैं।
FTA से आर्थिक विकास को मिली नई गति
भारत और यूरोपीय संघ के बीच हाल ही में हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का असर केवल कार उद्योग तक सीमित नहीं रहेगा। एमके ग्लोबल की रिपोर्ट के अनुसार, इस समझौते के चलते साल 2031 तक भारत का यूरोपीय संघ के साथ ट्रेड सरप्लस लगभग 51 अरब डॉलर यानी करीब 4.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच सकता है। इसके अलावा, भारत के कुल निर्यात में यूरोप की हिस्सेदारी वर्तमान के 17.3% से बढ़कर 23% तक होने की संभावना है।
