महाशिवरात्रि पर बनेगा दुर्लभ ग्रह योग का संयोग, शिवभक्तों की खुल सकती है किस्मत; जानें पूजन की विधि

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Published On: 9 February 2026

फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाने वाला महाशिवरात्रि का पर्व केवल उपवास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन का पावन प्रतीक माना जाता है। इस वर्ष महाशिवरात्रि 15 फरवरी को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाएगी, इस अवसर पर देशभर के शिवालयों में विशेष पूजा-अर्चना, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक किए जाएंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सच्चे मन से भगवान शिव की आराधना करने से शिव-पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है और वैवाहिक व दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाने वाला महाशिवरात्रि का पर्व केवल उपवास और पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन का पावन प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था, इसलिए यह दिन विशेष रूप से आस्था और भक्ति से जुड़ा है।

महाशिवरात्रि पर करे भोलेनाथ की पूजा

महाशिवरात्रि फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाने वाला एक प्रमुख हिंदू पर्व है, जिसे भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह का प्रतीक माना जाता है। इस दिन देशभर के शिवालयों में विशेष पूजा-अर्चना, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और रात्रि जागरण का आयोजन किया जाता है। भक्त व्रत रखकर बेलपत्र, दूध, दही, शहद और गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि पर श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों को सुख-समृद्धि, शांति और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद देते हैं।

शिवभक्तों के लिए यह शिवरात्रि है बेहद फलदायी

इस बार महाशिवरात्रि ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद विशेष और दुर्लभ मानी जा रही है क्योंकि इस दिन कई शुभ ग्रह योग और नक्षत्र का संगम बन रहा है, जो शिवभक्तों के जीवन में आध्यात्मिक उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा का संकेत देते हैं। वैदिक -पंचांग के अनुसार यह पर्व 15 फरवरी 2026 को मनाया जाएगा और शिवलिंग की पूजा का सबसे उत्तम समय निशीथ काल (मध्यरात्रि का समय) माना जाता है, यही वह समय है जब शिव की कृपा सबसे अधिक प्राप्त होती है।

इस साल महाशिवरात्रि श्रवण नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग के दुर्लभ संयोग में आ रही है, जिसका अर्थ है कि पूजा, ध्यान, दान और व्रत का फल सामान्य से कहीं अधिक प्रभावशाली माना जाता है। कई ज्योतिषों के अनुसार सूर्य, बुध और शुक्र जैसे ग्रहों की चाल भी इस दिन-रात में विशेष रूप से शुभ संयोग बनाती है, जिससे कुछ राशियों को जीवन में धन, सफलता और नई शुरुआत का लाभ मिल सकता है।

महाशिवरात्रि पर शिव पूजा में रखें इन बातों का ध्यान

  • महाशिवरात्रि के अवसर पर भगवान शिव की पूजा करते समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी माना जाता है।
  • शिवलिंग की पूजा अन्य देवी-देवताओं से अलग होती है।
  • शिव पूजा में शंख बजाना या शंख से जल अर्पित करना वर्जित है, क्योंकि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शंख की उत्पत्ति असुर शंखचूड़ से जुड़ी है।
  • जिनका वध भगवान शिव ने किया था। शिव को वैराग्य का प्रतीक माना जाता है, इसी कारण शिवलिंग पर हल्दी, कुमकुम या सिंदूर नहीं चढ़ाया जाता।
  • बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है, लेकिन महाशिवरात्रि के दिन स्वच्छ, अखंड और तीन पत्तों वाला बेलपत्र ही अर्पित करना चाहिए।
  • इसके अलावा केतकी, कनेर, कमल और तुलसी जैसे फूल-पत्ते शिव पूजा में वर्जित माने गए हैं।
  • बेलपत्र, धतूरा, भांग और शमी पत्र चढ़ाना शुभ फलदायी माना जाता है।
  • शिवलिंग पर टूटे हुए चावल यानी खंडित अक्षत अर्पित नहीं करने चाहिए, बल्कि साबुत, स्वच्छ और पूर्ण अक्षत ही भगवान शिव को चढ़ाने चाहिए।

डिस्केलमर: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं विभिन्न माध्यमों/ ज्योतिषियों/ पंचांग/ प्रवचनों/ मान्यताओं/ धर्मग्रंथों पर आधारित हैं. MPNews इनकी पुष्टि नहीं करता है

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