ज्योतिष | प्रदोष व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए रखा जाने वाला एक महत्वपूर्ण व्रत है। मान्यता है कि महादेव स्वयं वैराग्य जीवन जीते हैं, लेकिन अपने भक्तों पर असीम कृपा बरसाते हैं। उनकी कृपा से भक्तों को जीवन में सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है और किसी चीज की कमी नहीं रहती। शिव पुराण में प्रदोष व्रत की महिमा का विस्तार से वर्णन किया गया है, जिसमें बताया गया है कि इस व्रत को करने से भक्त को सुख, समृद्धि और सभी प्रकार की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। प्रदोष व्रत के अवसर पर मंदिरों में भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है, जहां भक्त श्रद्धा और भक्ति भाव से भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत मनाया जाता है। इस दिन भक्तजन भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना कर व्रत रखते हैं और विभिन्न कामनाओं की सिद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं।
प्रदोष व्रत
प्रदोष व्रत हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा का विधान है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से भक्तों के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है। शिवपुराण में भी प्रदोष व्रत की महिमा का वर्णन मिलता है। भाद्रपद माह का पहला प्रदोष व्रत इस बार 20 अगस्त को पड़ रहा है, इस अवसर पर मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और रुद्राभिषेक का आयोजन किया जाता है।
मुहूर्त
भाद्रपद महीने का पहला प्रदोष व्रत 20 अगस्त को रखा जाएगा। यह पर्व त्रयोदशी तिथि पर मनाया जाता है। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 20 अगस्त दोपहर 1 बजकर 58 मिनट से शुरू होकर 21 अगस्त दोपहर 12 बजकर 44 मिनट तक रहेगी। इस तिथि पर प्रदोष काल में शिव-शक्ति की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। ऐसे में इस बार बुधवार 20 अगस्त को प्रदोष व्रत का पालन किया जाएगा।
पूजा विधि
- इस दिन व्रत रखने वाले भक्त प्रातः स्नान कर संकल्प लेते हैं और पूरे दिन उपवास रखते हैं।
- संध्या काल में भगवान शिव का पूजन सबसे शुभ माना जाता है।
- पूजा में सबसे पहले शिवलिंग का गंगाजल, दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक किया जाता है।
- उसके बाद बेलपत्र, धतूरा, अक्षत, चंदन, भस्म और फल-फूल अर्पित किए जाते हैं।
- दीपक जलाकर ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
- मान्यता है कि प्रदोष व्रत की विधिपूर्वक पूजा करने से भगवान शिव और माता पार्वती प्रसन्न होकर भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
भाद्रपद माह का प्रदोष व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने का विशेष दिन माना जाता है। यह प्रदोष व्रत विशेष रूप से मेष, वृषभ, सिंह, तुला राशियों के जातकों के लिए बेहद शुभ फल देने वाला रहेगा।
मेष राशि
मेष राशि के जातकों के लिए प्रदोष व्रत अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। इस दिन व्रत और भगवान शिव की आराधना करने से उन्हें करियर और व्यवसाय में सफलता के अवसर प्राप्त होते हैं। साथ ही रुके हुए कामों में गति आती है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। इस व्रत के प्रभाव से जातकों के जीवन में उत्साह, आत्मविश्वास और नई ऊर्जा का संचार होता है।
वृषभ राशि
प्रदोष व्रत वृषभ राशि वालों के लिए बेहद शुभ फलदायी माना गया है। इस दिन भगवान शिव की आराधना करने से जातकों के जीवन में स्थिरता और समृद्धि आती है। वृषभ राशि के जातकों को पारिवारिक जीवन में सुख-शांति का लाभ मिलेगा। कार्यक्षेत्र में तरक्की के योग बनेंगे और धन लाभ के अवसर प्राप्त होंगे। साथ ही रुके हुए काम पूरे होने की संभावना है।
तुला राशि
तुला राशि वालों के लिए प्रदोष व्रत अत्यंत शुभकारी माना जाता है। इस व्रत के प्रभाव से जातकों को जीवन में संतुलन और सामंजस्य प्राप्त होता है। दांपत्य जीवन में प्रेम और मधुरता बनी रहती है, वहीं आर्थिक स्थिति भी मजबूत होती है। भगवान शिव की कृपा से करियर और व्यवसाय में उन्नति के अवसर प्राप्त होते हैं।
सिंह राशि
सिंह राशि के जातकों के लिए प्रदोष व्रत अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से सिंह राशि वालों को करियर और व्यवसाय में सफलता प्राप्त होती है। उनकी नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। साथ ही आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और रुके हुए कार्यों में तेजी आती है। जो जातक जीवन में नई दिशा की तलाश कर रहे हैं, उनके लिए प्रदोष व्रत विशेष रूप से लाभकारी होता है।
डिस्केलमर: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं विभिन्न माध्यमों/ ज्योतिषियों/ पंचांग/ प्रवचनों/ मान्यताओं/ धर्मग्रंथों पर आधारित हैं. MPNews इनकी पुष्टि नहीं करता है।
