हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना गया है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और हर महीने के कृष्ण पक्ष व शुक्ल पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को रखा जाता है। मान्यता है कि जब यह व्रत पौष मास के कृष्ण पक्ष में आता है, तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है, जिसे सफला एकादशी व्रत कहा जाता है। इस दिन श्रद्धालु विधि-विधान से भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा करते हैं, व्रत रखते हैं और कथा का पाठ करते हैं। धार्मिक विश्वास है कि सफला एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट होते हैं, जीवन में सुख-समृद्धि आती है और किए गए कार्य सफल होते हैं।
सनातन परंपरा में एकादशी का व्रत जीवन से जुड़े सभी दोष और पाप से मुक्ति दिलाने वाला अत्यंत पवित्र व्रत माना जाता है, लेकिन हिंदू मान्यताओं के अनुसार यह व्रत बिना पारण के अधूरा माना जाता है। एकादशी व्रत तिथि पर दिनभर उपवास रखने और भगवान विष्णु की भक्ति करने के बाद अगली तिथि द्वादशी में शुभ मुहूर्त पर पारण करना आवश्यक होता है।
व्रत पारण
सफला एकादशी का व्रत 15 दिसंबर को रखा गया था।, जिसमें भगवान विष्णु की उपासना और व्रत का पालन किया जाता है। इस व्रत का पारण अगले दिन 16 दिसंबर को द्वादशी तिथि में सुबह के शुभ समय पर किया जाएगा, ताकि व्रत का फल पूर्ण रूप से प्राप्त हो सके। पारण ठीक समय में करना आवश्यक माना जाता है, जो द्वादशी तिथि के दौरान निर्धारित शुभ मुहूर्त में किया जाता है। श्रद्धालु दिनभर उपवास, पूजा-अर्चना और दान आदि करके भगवान विष्णु से सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना करते हैं और सुबह द्वादशी पर पारण कर व्रत समाप्त करते हैं।
शुभ मुहूर्त
हिंदू मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु के व्रत को विधिवत समाप्त करने की प्रक्रिया को पारण कहा जाता है, जो एकादशी व्रत के अगले दिन सूर्योदय के बाद और द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले किया जाता है, जबकि एकादशी तिथि में पारण करना वर्जित माना गया है। पंचांग के अनुसार सफला एकादशी व्रत का पारण कल 16 दिसंबर 2025, मंगलवार को प्रातः 07:07 बजे से 09:11 बजे के बीच किया जा सकता है।
पूजा विधि
- सफला एकादशी व्रत का पारण 16 दिसंबर, मंगलवार को प्रातःकाल सूर्योदय से पहले उठकर स्नान-ध्यान करने के बाद किया जाता है।
- तन और मन से शुद्ध होकर सबसे पहले भगवान श्रीहरि विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें
- पंचामृत के साथ तुलसी दल अर्पित करें।
- पूजा के बाद भगवान विष्णु को चढ़ाई गई तुलसी को प्रसाद रूप में बिना चबाए ग्रहण करना चाहिए।
- इसके पश्चात सात्विक भोजन करें, जिसमें चावल का सेवन करना शुभ माना गया है।
- पारण के दिन श्रद्धानुसार मंदिर के पुजारी या जरूरतमंदों को दान करना भी पुण्यदायी माना जाता है।
डिस्केलमर: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं विभिन्न माध्यमों/ ज्योतिषियों/ पंचांग/ प्रवचनों/ मान्यताओं/ धर्मग्रंथों पर आधारित हैं. MPNews इनकी पुष्टि नहीं करता है।
