कड़ाके की ठंड के दौरान सर्दी, छींक, खांसी और हल्का बुखार अक्सर सामान्य मौसमीय परेशानी समझकर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं, लेकिन अगर खांसी के साथ सीने में दर्द या सांस लेने में कठिनाई हो तो यह निमोनिया का संकेत हो सकता है। एमडी फिजिशियन डॉ. सीमा यादव के अनुसार, निमोनिया का समय पर इलाज न करना इसे जानलेवा बना सकता है।
कड़ाके की ठंड में छींक, खांसी या हल्का बुखार अक्सर आम समझ लिया जाता है, लेकिन अगर खांसी के साथ सीने में दर्द या सांस लेने में कठिनाई हो रही हो, तो यह निमोनिया का संकेत हो सकता है। इस स्थिति को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और समय पर इलाज जरूरी है।
हल्के में न लें
सर्दी-खांसी को हल्के में लेने से बचें, वरना यह निमोनिया का संकेत हो सकता है। खासकर जब खांसी के साथ सीने में दर्द, तेज बुखार और सांस लेने में तकलीफ हो, तो तुरंत सावधानी बरतनी जरूरी है। एमडी फिजिशियन डॉ. सीमा यादव के अनुसार, समय पर पहचान और इलाज न होने पर निमोनिया शरीर के फेफड़े को प्रभावित कर सकता है। इसलिए सर्दी-खांसी को सामान्य समझकर नजरअंदाज न करें और लक्षण महसूस होते ही डॉक्टर से संपर्क करें।
क्या है निमोनिया?
निमोनिया एक गंभीर संक्रमण है जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है। यह संक्रमण फेफड़ों की वायु थैलियों में सूजन पैदा कर देता है और गंभीर मामलों में मवाद या पानी भरने के कारण शरीर को ऑक्सीजन लेने में कठिनाई होती है। जब फेफड़े ठीक से काम नहीं करते, तो शरीर के अन्य अंगों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुँच पाती, जिससे उनका कार्य भी प्रभावित होने लगता है।
देखें लक्षण
- कड़ाके की ठंड में अक्सर लोग सामान्य सर्दी-खांसी या फ्लू को हल्के में ले लेते हैं।
- तेज बुखार, कंपकंपी, लगातार खांसी और कफ (कभी-कभी खून के साथ) सांस लेने में तकलीफ को हलके में नही लेना चाहिए।
- सीने में दर्द, होंठ या नाखून का नीला पड़ना, अत्यधिक कमजोरी, भूख न लगना, उल्टी या दस्त जैसी समस्या हो, तो यह निमोनिया का संकेत हो सकता है।
- ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है और तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
सर्दियों में खुद को रखें सुरक्षित
सर्दियों में निमोनिया से बचाव के लिए अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रखना बेहद जरूरी है। ताजी सब्जियां खाएं और तला-भुना खाना कम करें। डॉक्टरों की सलाह है कि दूध में हल्दी या अंडे की जर्दी मिलाकर पीने से शरीर को अंदरूनी गर्माहट मिलती है। साथ ही, गर्म कपड़ों से खुद को ढकें और अचानक तापमान बदलने से बचें। अगर खांसी तीन दिन से ज्यादा रहे या सांस फूलने लगे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
