गुरु गोबिंद सिंह जी की जयंती पौष माह की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर मनाया जाता है। यह पर्व 27 दिसंबर को देशभर के गुरुद्वारों में इसे श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर गुरुद्वारों में अखंड पाठ और कीर्तन का आयोजन किया जाएगा, नगर कीर्तन निकाले जाएंगे और लंगर भी वितरित किया जाएगा। श्रद्धालु इस दिन गुरु साहिब जी की शिक्षाओं को स्मरण कर उनकी याद में श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
सिख धर्म के अनुयायियों के लिए गुरु गोबिंद सिंह जयंती एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो सिखों के दसवें गुरु, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालु गुरुद्वारों में मत्था टेकते हैं और गुरु जी द्वारा दी गई शिक्षाओं और उपदेशों का स्मरण करते हैं।
गुरु गोबिंद सिंह जयंती
गुरु गोबिंद सिंह जी की जयंती सिख धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जिसे श्रद्धालु बड़े ही श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाते हैं। इस दिन सिख समुदाय के लोग गुरुद्वारों में जाकर मत्था टेकते हैं और गुरु साहिब जी द्वारा सिखाई गई शिक्षाओं का स्मरण करते हैं। गुरु गोबिंद सिंह जी ने सिख धर्म को मजबूत करने के साथ-साथ साहस, धर्म और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। इस अवसर पर गुरुद्वारों में कीर्तन, प्रवचन और अखंड पाठ का आयोजन किया जाता है, जिससे सभी लोग आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त करते हैं और गुरु साहिब जी की शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लेते हैं।
359वीं वर्षगांठ
गुरु गोबिंद सिंह जयंती 27 दिसंबर को गुरु गोबिंद सिंह जी की 359वीं जन्म वर्षगांठ मनाई जाएगी। इस वर्ष सप्तमी तिथि का आरंभ 26 दिसंबर को दोपहर 01:43 बजे होगा और यह 27 दिसंबर 2025 की दोपहर 01:09 बजे समाप्त होगी। इस अवसर पर श्रद्धालु गुरुद्वारों में पहुंचकर गुरुओं की शिक्षाओं को याद करेंगे और विशेष कीर्तन एवं धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।
इनके योगदान का इतिहास
सिख धर्म के दसवें गुरु, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का योगदान इतिहास में अमूल्य है। 1699 में बैसाखी के दिन उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना कर सिख समुदाय को एक नई पहचान दी। गुरु साहिब ने पांच ककार केश, कंघा, कड़ा, कच्छा और कृपाण का महत्व बताते हुए सिखों को अनुशासन और साहस की सीख दी। उन्होंने मुगल अत्याचारों के खिलाफ साहसपूर्वक आवाज उठाई और सिखों को न्याय और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। गुरु गोबिंद सिंह जी ने गुरु ग्रंथ साहिब को सिखों का शाश्वत गुरु घोषित कर धर्म और शिक्षाओं की स्थायी धरोहर दी।
ऐसे मनाते हैं यह जयंती
- गुरु गोबिंद सिंह जयंती बड़े हर्ष और श्रद्धा के साथ मनाई जाती है।
- इस अवसर पर देशभर के गुरुद्वारों में अखंड पाठ साहिब और कीर्तन का आयोजन किया जाता है।
- जिसमें श्रद्धालु गुरु साहिब की शिक्षाओं का स्मरण करते हैं।
- कई स्थानों पर भव्य नगर कीर्तन निकाले जाते हैं और लोगों में गुरु साहिब की शिक्षाओं का प्रचार किया जाता है।
- इसके साथ ही सभी गुरुद्वारों में लंगर का आयोजन होता है और जरूरतमंदों को भोजन, कपड़े व दवाइयां वितरित की जाती हैं।
- घरों में भी गुरबाणी का पाठ किया जाता है, जिससे परिवार में धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण बनता है।
