पहाड़ी आलू है प्राकृतिक सुपरफूड, पेट और इम्यूनिटी दोनों को रखें मजबूत

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Published On: 28 January 2026

आजकल बाजार में मिलने वाला भोजन खासकर आलू अक्सर केमिकल और प्रिज़र्वेटिव से भरा होता है, इसलिए लोग फिर से प्राकृतिक और पारंपरिक खाद्य पदार्थों की ओर लौट रहे हैं। इसी प्रवृत्ति में पहाड़ी क्षेत्रों में पीढ़ियों से खाई जाने वाली गेठी (Air Potato) यानी कंदमूल, पहाड़ी आलू या बेल वाला आलू फिर से ध्यान में आ रही है। यह बेल पर उगने वाला कंद स्वाद में तो अच्छा है ही, साथ ही इसमें कई औषधीय गुण भी पाए जाते हैं, जो इसे स्वास्थ्य के लिए एक खजाने जैसा बना देते हैं।

आलू अपने पोषक तत्वों और औषधीय गुणों के कारण कई समस्याओं में लाभकारी है। इसे खाने से न केवल कमजोरी दूर होती है, बल्कि यह कब्ज जैसी परेशानियों में भी रामबाण साबित होता है। इसके अंदर मौजूद विटामिन, मिनरल और फाइबर इसे महंगे सुपरफूड्स के मुकाबले अधिक प्रभावी बनाते हैं।

आलू में पाए स्वाद

पहाड़ी आलू में कई महत्वपूर्ण पोषक तत्व पाए जाते हैं जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं। इनमें विटामिन C की अच्छी मात्रा होती है, जो इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने और त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद करता है। इसके अलावा, इसमें विटामिन B6, पोटैशियम और फोलेट जैसे मिनरल्स भी मौजूद होते हैं, जो दिल और मस्तिष्क की सेहत के लिए जरूरी हैं। पहाड़ी आलू में फाइबर भी प्रचुर मात्रा में होता है, जो पाचन तंत्र को ठीक रखने और ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करता है। साथ ही, इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स भी पाए जाते हैं, जो शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करते हैं। इस तरह, पहाड़ी आलू न केवल स्वाद में लाजवाब होता है, बल्कि पोषण के लिहाज से भी बेहद उपयोगी माना जाता है।

पहाड़ों का पारंपरिक भोजन

पहाड़ी इलाकों में गेठी को खाने के कई तरीके प्रचलित हैं। कुछ लोग इसे उबालकर नमक और मिर्च के साथ खाते हैं, तो कुछ इसे भूनकर या मसालेदार सब्ज़ी के रूप में तैयार करते हैं। सही तरीके से पकाई जाए तो गेठी हल्की और स्वादिष्ट होती है, जो पेट पर भारी नहीं पड़ती। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इसे मौसम के अनुसार अपने रोज़मर्रा के भोजन में शामिल करते हैं और यह स्थानीय खानपान का अहम हिस्सा बनी हुई है।

फायदे

  • गेठी स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है। इसमें भरपूर फाइबर पाया जाता है, जो पाचन तंत्र को मजबूत करता है और कब्ज जैसी समस्याओं में राहत देता है। इसके साथ ही इसमें आयरन और जरूरी मिनरल्स भी मौजूद होते हैं, जो शरीर को ताकत देते हैं और कमजोरी दूर करने में मदद करते हैं। इसी कारण पहाड़ों में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी इसे अपने आहार में शामिल करते हैं।
  • गांव की हेमवंती देवी ने बताया कि पुराने समय में जब आधुनिक दवाइयाँ आसानी से उपलब्ध नहीं होती थीं, तब लोग देसी चीज़ों पर निर्भर रहते थे। उन्होंने कहा कि उनके जमाने में गेठी रोज़मर्रा के खाने का हिस्सा थी और इसे पेट खराब होने, कमजोरी या काम की थकान में इस्तेमाल किया जाता था। हेमवंती देवी के अनुसार गेठी पूरी तरह शुद्ध और प्राकृतिक होने के कारण दवा जैसी असरदार होती थी।
  • पहाड़ी आलू स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी हैं। आयुर्वेदिक और प्राकृतिक चिकित्सकों के अनुसार, इसमें मौजूद पोषक तत्व और फाइबर शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं, इम्यूनिटी को बढ़ाते हैं और हड्डियों तथा मांसपेशियों को मजबूत बनाते हैं।
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