21 जुलाई को है कामिका एकादशी, बन रहे तीन शुभ योग! जानिए शुभ मुहूर्त; व्रत कथा और महत्व

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Published On: 20 July 2025

ज्योतिष | सावन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को कामिका एकादशी का व्रत रखा जाता है, जो इस वर्ष 21 जुलाई सोमवार को मनाई जाएगी। इस बार यह एकादशी विशेष मानी जा रही है क्योंकि इस दिन तीन शुभ योग वृद्धि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। कामिका एकादशी व्रत के दौरान पूजा के समय व्रत कथा का श्रवण करना अत्यंत आवश्यक होता है, जिससे व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है। यह दिन भक्तों के लिए आध्यात्मिक उन्नति और पुण्य प्राप्ति का श्रेष्ठ अवसर माना गया है।

कामिका एकादशी व्रत सावन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। इस वर्ष यह व्रत विशेष रूप से फलदायक माना जा रहा है, दिन तीन शुभ योग वृद्धि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का संयोग बन रहा है।

कामिका एकादशी

कामिका एकादशी हिंदू धर्म में एक अत्यंत पुण्यदायक और शुभ एकादशी मानी जाती है। यह श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को आती है। इस दिन भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा और व्रत किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को रखने से समस्त पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

महत्व

कामिका एकादशी का महत्व बहुत ही विशेष और आध्यात्मिक रूप से माना जाता है। यह एकादशी श्रावण मास के कृष्ण पक्ष में आती है और भगवान विष्णु को समर्पित होती है। इस दिन उपवास और पूजा से मनुष्य के पाप नष्ट होते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि इस एकादशी पर व्रत रखने से गंगा स्नान के बराबर पुण्य प्राप्त होता है। मंदिर जाकर दीप जलाना और तुलसी के साथ भगवान विष्णु की पूजा करना विशेष फलदायी माना गया है।

इस दिन भगवान विष्णु का स्मरण, नाम जप, कीर्तन और व्रत से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह भक्ति को और गहरा करने का दिन है। “कामिका” का अर्थ है – इच्छाओं को शांत करने वाली। इस एकादशी का व्रत व्यक्ति को सांसारिक बंधनों से मुक्त करके मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर करता है। हर साल कामिका एकादशी श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को आती है, जो इस बार 21 जुलाई 2025, सोमवार को है। श्रावण का यह महीना devotion (भक्ति) की वर्षा से भीगा होता है। जैसे बारिश की बूंदें धरती को शुद्ध करती हैं, वैसे ही इस पावन तिथि पर भगवान विष्णु की सच्चे मन से पूजा करने से मन और आत्मा दोनों शुद्ध हो जाते हैं।

व्रत कथा और धार्मिक महत्व

कामिका एकादशी का पर्व वर्ष 2025 में 21 जुलाई, सोमवार को मनाया जाएगा। यह पावन व्रत श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को आता है, जो भगवान विष्णु की भक्ति के लिए अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु उपवास रखकर श्रीहरि विष्णु की पूजा-अर्चना करते हैं और मोक्ष की प्राप्ति की कामना करते हैं।

तिथि

इस वर्ष एकादशी तिथि की शुरुआत 20 जुलाई 2025, रविवार को दोपहर 12:12 बजे होगी और इसका समापन 21 जुलाई, सोमवार को सुबह 9:38 बजे होगा। व्रत रखने वाले भक्त 22 जुलाई 2025 को प्रातः 5:52 बजे से 7:05 बजे के बीच द्वादशी तिथि में पारण (व्रत खोलने) का शुभ समय प्राप्त करेंगे। मान्यता है कि इस शुभ काल में व्रत का पारण करने से पूर्ण फल की प्राप्ति होती है।

व्रत कथा

श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी, जिसे कामिका एकादशी कहा जाता है, इस बार 21 जुलाई 2025 को आ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की उपासना और व्रत रखने से व्यक्ति को अपने पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।

पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार, एक समय एक गुस्सैल व्यक्ति ने क्रोधवश एक ब्राह्मण की हत्या कर दी थी। अपराधबोध से ग्रसित होकर वह जंगल चला गया और वहां एक संत के निर्देश पर कामिका एकादशी का व्रत रखा। उसने भगवान विष्णु की पूजा की, क्षमा मांगी और जीवन में आत्मिक शांति प्राप्त की।

मान्यता है कि इस दिन दीप दान का विशेष महत्व है। यदि कोई भक्त मंदिर, तुलसी, पीपल या केले के पेड़ के नीचे तिल या घी का दीप जलाता है, तो उसके पूर्वज स्वर्ग में अमृत का आनंद पाते हैं। यह व्रत न केवल पापों का नाश करता है, बल्कि भक्तों को दिव्यता और शांति का अनुभव भी कराता है।

कामिका एकादशी का धार्मिक महत्व

कामिका एकादशी, जो श्रावण मास के कृष्ण पक्ष में आती है, भगवान विष्णु की भक्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह व्रत उन श्रद्धालुओं के लिए विशेष रूप से फलदायी होता है जो अपने जीवन में पाप, अपराधबोध या मानसिक अशांति से मुक्ति पाना चाहते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत का पुण्य गंगा स्नान, गौदान और यज्ञ के बराबर माना गया है।

ऐसा कहा जाता है कि जो भी व्यक्ति इस दिन सच्चे मन से व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा करता है, उसकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और उसे पापों से मुक्ति मिलती है। तुलसी जल से भगवान विष्णु की पूजा करना इस दिन विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

डिस्केलमर: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं विभिन्न माध्यमों/ ज्योतिषियों/ पंचांग/ प्रवचनों/ मान्यताओं/ धर्मग्रंथों पर आधारित हैं. MPNews इनकी पुष्टि नहीं करता है.

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