12 अगस्त को रखें भाद्रपद संकष्टी चतुर्थी व्रत, गणेश जी की कृपा पाने का पवित्र अवसर; जानें पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Author Picture
Published On: 12 August 2025

ज्योतिष | संकष्टी चतुर्थी व्रत हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है, लेकिन भाद्रपद माह की संकष्टी चतुर्थी विशेष रूप से महत्वपूर्ण होती है, जिसे बहुला या हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना के साथ-साथ चंद्रमा की पूजा भी की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी व्रत से जीवन में आने वाली सभी बाधाएं और विघ्न दूर हो जाते हैं तथा व्यक्ति को सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। इसलिए इस दिन व्रत और भगवान गणेश की आराधना को अत्यंत पुण्यकारी माना गया है।

भाद्रपद मास की बहुला चतुर्थी साल की 4 प्रमुख चतुर्थी में से एक माना जाती है, इसलिए इसका विशेष महत्व धर्म शास्त्रों में बताया गया है, इस दिन महिलाएं भगवान गणेश और चंद्रमा की पूजा करती हैं, भाद्रपद कृष्ण पक्ष में आने वाली संकष्टी चतुर्थी को हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी, भादो चौथ और कई जगहों पर बहुला चतुर्थी के नाम से जाना जाता है।

भाद्रपद संकष्टी चतुर्थी का महत्व

भाद्रपद मास की संकष्टी चतुर्थी विशेष महत्व रखती है। यह व्रत हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है, जिसमें भगवान गणेश की पूजा की जाती है। भाद्रपद संकष्टी चतुर्थी का व्रत पूरी श्रद्धा और भक्तिभाव से रखा जाता है, क्योंकि इसे गणपति जी की विशेष कृपा का दिन माना जाता है। इस दिन व्रती लोग दिनभर उपवास रखते हैं और संध्या काल में चंद्र दर्शन के बाद गणेश जी की पूजा अर्चना करते हैं। इसके साथ ही, इस व्रत से जीवन में सुख, समृद्धि और बाधाओं का नाश होता है। भक्तजन इस दिन अपने मनोकामनाओं की प्राप्ति के लिए भगवान गणेश से आशीर्वाद लेते हैं। भाद्रपद संकष्टी चतुर्थी 2025 का व्रत रखने से आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास की संकष्टी चतुर्थी पर पूजा का शुभ समय शाम 6 बजकर 50 मिनट से रात 7 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। इस वर्ष चतुर्थी तिथि 12 अगस्त की सुबह 8 बजकर 41 मिनट से प्रारंभ होकर 13 अगस्त की सुबह 6 बजकर 36 मिनट पर समाप्त होगी। मान्यता है कि इस शुभ मुहूर्त में गणपति बप्पा की पूजा-अर्चना करने से व्रत का पूरा फल मिलता है। इसलिए भक्तगण इस समय का विशेष ध्यान रखें और विधिपूर्वक पूजा करें।

व्रत की पूजा विधि

  • सुबह सूर्योदय से पहले उठकर शुद्ध स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  • घर के पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें और गंगाजल से उसे पवित्र करें।
  • व्रत का संकल्प लेकर एक साफ चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं।
  • उस चौकी पर भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • गणेश जी को दूर्वा घास, चावल, रंग-बिरंगे पुष्प, धूप, दीप, मोदक तथा लड्डू अर्पित करें।
  • इसके बाद गणपति मंत्र और स्तोत्रों का पाठ करें, जैसे “ॐ गण गणपतये नमः”।
  • पूजा के अंत में आरती करें और भगवान की भक्ति में लीन हों।
  • पूरे दिन व्रत का पालन करें, भोजन में व्रत के नियमों का ध्यान रखें।
  • रात में चंद्रमा के उदय के समय चंद्रमा को जल अर्पित करें (चंद्र दर्शन और अर्घ्य देना)।
  • इस प्रकार व्रत सम्पन्न करें।

डिस्केलमर: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं विभिन्न माध्यमों/ ज्योतिषियों/ पंचांग/ प्रवचनों/ मान्यताओं/ धर्मग्रंथों पर आधारित हैं. MPNews इनकी पुष्टि नहीं करता है।

Related News
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp