बसंत पंचमी का पर्व ज्ञान, विद्या और कला को समर्पित होता है, इस दिन मां सरस्वती की विशेष पूजा की जाती है। उन्हें बुद्धि, विवेक और शिक्षा की देवी माना जाता है और ऐसी मान्यता है कि इस शुभ दिन पर किए गए छोटे-छोटे उपाय बच्चों के बौद्धिक विकास को तेज करते हैं तथा पढ़ाई में आ रही बाधाओं को दूर करने में मदद करते हैं। खासतौर पर विद्यार्थियों के लिए बसंत पंचमी को अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि इस दिन की गई साधना और पूजा से ज्ञान, एकाग्रता और सीखने की क्षमता बढ़ती है।
बसंत पंचमी वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक पर्व है, जिसे पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह दिन विद्या, बुद्धि और ज्ञान की देवी मां सरस्वती को समर्पित होता है, जिनकी पूजा कर विद्यार्थी और विद्वान ज्ञान व सफलता की कामना करते हैं। बसंत पंचमी का पर्व 23 जनवरी को मनाया जाएगा।
बसंत पंचमी
बसंत पंचमी का पर्व पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। यह दिन विद्या, कला और संगीत की देवी मां सरस्वती को समर्पित होता है, इसलिए स्कूलों, कॉलेजों और मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की गई। लोगों ने पीले वस्त्र धारण किए और घरों व पूजा स्थलों को पीले फूलों से सजाया, जो बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक माने जाते हैं। कई स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, पतंगबाजी और सरस्वती वंदना का आयोजन हुआ, वहीं विद्यार्थियों ने शिक्षा और ज्ञान में प्रगति की कामना की। इस अवसर पर आपसी सौहार्द और नई ऊर्जा के साथ बसंत ऋतु का स्वागत किया गया।
महत्व
बसंत पंचमी का पर्व ज्ञान, बुद्धि, संगीत और कला की देवी मां सरस्वती को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन मां सरस्वती की पूजा करने से अज्ञान का नाश होता है और शिक्षा के साथ-साथ रचनात्मक क्षेत्रों में सफलता प्राप्त होती है। यही कारण है कि छात्र, कलाकार, संगीतकार और विद्वान बसंत पंचमी को विशेष श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाते हैं तथा इसे नए आरंभ और बौद्धिक उन्नति का प्रतीक माना जाता है।
शुभ मुहूर्त
सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त 23 जनवरी को तय किया गया है। इस दिन पूजा के लिए सबसे उत्तम समय सुबह 7:13 बजे से लेकर दोपहर 12:33 बजे तक रहेगा। मान्यता है कि इसी अवधि में मां सरस्वती की पूजा करने से विद्या, बुद्धि और ज्ञान का आशीर्वाद प्राप्त होता है, इसलिए श्रद्धालु इस शुभ समय में विधि-विधान से पूजा कर सकते हैं।
पूजा विधि
- घर पर बसंत पंचमी मनाने के लिए लोग सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं।
- लोग पीले या सफेद रंग के वस्त्र धारण करते हैं, जिन्हें ऊर्जा, समृद्धि और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है।
- इस दिन घर में मां सरस्वती की पूजा की जाती है।
- जिसके लिए घर को गेंदा फूलों से सजाया जाता है।
- चावल के आटे से सुंदर अल्पना या रंगोली बनाई जाती है।
- मां सरस्वती को पीले फूल, मिठाई और प्रसाद अर्पित किया जाता है
- शिक्षा, ज्ञान और बुद्धि की प्राप्ति की कामना की जाती है।
डिस्केलमर: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं विभिन्न माध्यमों/ ज्योतिषियों/ पंचांग/ प्रवचनों/ मान्यताओं/ धर्मग्रंथों पर आधारित हैं. MPNews इनकी पुष्टि नहीं करता है।
