7 सितंबर को लगेगा साल का दूसरा चंद्र ग्रहण, भारत में पूरी तरह दिखाई देगा; नहीं होंगे शुभ कार्य

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Published On: 7 September 2025

साल 2025 का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण 7 सितंबर, रविवार को लगने वाला है। यह ग्रहण भारत के साथ-साथ एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और न्यूजीलैंड के कुछ हिस्सों में देखा जा सकेगा। इस साल कुल चार ग्रहण होंगे, लेकिन भारतीयों के लिए यह ही चंद्र ग्रहण दिखाई देगा। खास बात यह है कि यह ग्रहण भाद्रपद पूर्णिमा के दिन लग रहा है और इसे ब्लड मून के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन से पितृपक्ष की शुरुआत भी होगी और भारत में दिखाई देने के कारण इस चंद्र ग्रहण का सूतक काल भी मान्य रहेगा।

वर्ष 2025 में दूसरा चंद्र ग्रहण भाद्रपद माह की पूर्णिमा के दिन लगेगा, जो कि पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा और भारत में भी देखा जा सकेगा। इसी दिन से पितृपक्ष की शुरुआत भी होगी। भारत में दिखाई देने के कारण इस चंद्र ग्रहण का सूतक काल भी मान्य रहेगा।

चंद्र ग्रहण

चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, जिससे पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। इस दौरान चंद्रमा पूरी तरह या आंशिक रूप से अंधेरे में ढक जाता है। चंद्र ग्रहण को सामान्यत: दो प्रकार का माना जाता है। पूर्ण चंद्र ग्रहण और आंशिक चंद्र ग्रहण। पूर्ण चंद्र ग्रहण में चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की छाया में आता है और आंशिक चंद्र ग्रहण में केवल कुछ हिस्सा ही छाया में आता है। यह खगोलीय घटना रात के समय दिखाई देती है और इसे विशेष रूप से खगोल विज्ञान में देखा और अध्ययन किया जाता है। इस साल चंद्र ग्रहण 7 सितंबर, रविवार को लगने वाला है।

भाद्रपद पूर्णिमा

इस साल का दूसरा चंद्र ग्रहण भाद्रपद माह की पूर्णिमा पर लगेगा। यह पूर्ण चंद्र ग्रहण 7 सितंबर, रविवार को रात 9:58 बजे शुरू होगा और रात 1:26 बजे समाप्त होगा। इस दौरान चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की छाया में ढक जाएगा और लाल रंग का दिखाई देगा, जिसे खगोलविद ब्लड मून कहते हैं।

भारत में लागू होगा सूतक काल

चंद्र ग्रहण के अवसर पर भारत में सूतक काल भी लागू होगा। चंद्र ग्रहण पूरी तरह भारत में दिखाई देगा, इसलिए सूतक काल मान्य रहेगा। ग्रहण लगने के 9 घंटे पहले से सूतक काल शुरू होता है, जो इस बार 7 सितंबर को दोपहर 12 बजकर 57 मिनट से मान्य होगा। इस दौरान सभी तरह के धार्मिक और शुभ कार्यों पर रोक रहेगी।

न करें ये काम 

  • चंद्र ग्रहण के दौरान लगने वाले सूतक काल में कई तरह के पाबंदियाँ होती हैं।
  • इस दौरान पूजा-पाठ पर रोक रहती है, हालांकि मंत्र जाप किया जा सकता है।
  • सूतक काल में भोजन बनाना या खाना उचित नहीं माना जाता है ।
  • ग्रहण के शुरू होते ही मंदिरों के पट बंद कर दिए जाते हैं और किसी भी तरह के शुभ कार्य नहीं किए जाते।
  • गर्भवती महिलाओं को इस दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

नहीं होंगे शुभ कार्य

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण और सूतक काल को अशुभ समय माना जाता है। शास्त्रों में बताया गया है कि इस समय निगेटिव ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है, इसलिए इस दौरान विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। इसी कारण धार्मिक दृष्टि से इस समय शुभ कार्यों से परहेज किया जाता है, लेकिन भक्ति और साधना करना अत्यंत फलदायक माना जाता है। इस दौरान प्रभु का नाम जपना, मंत्र जाप, हनुमान चालीसा का पाठ और भगवद गीता का अध्ययन करना लाभदायक माना जाता है। कई लोग ग्रहण के समय उपवास भी रखते हैं ताकि मन और शरीर दोनों शुद्ध रहें।

विशेष दिन

इस साल पितृपक्ष 7 सितंबर से शुरू हो रहा है, और इसी दिन रात 9 बजकर 58 मिनट से चंद्र ग्रहण लगने वाला है। चंद्र ग्रहण के 9 घंटे पहले से सूतक काल मान्य हो जाता है, जिसके दौरान पूजा-पाठ और सभी धार्मिक कार्य वर्जित माने जाते हैं। ऐसे में 7 सितंबर को दोपहर 12 बजकर 58 मिनट तक का समय ही श्राद्ध और तर्पण करने के लिए उचित रहेगा।

डिस्केलमर: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं विभिन्न माध्यमों/ ज्योतिषियों/ पंचांग/ प्रवचनों/ मान्यताओं/ धर्मग्रंथों पर आधारित हैं. MPNews इनकी पुष्टि नहीं करता है।

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