देवउठनी एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि को सूर्योदय के बाद किया जाता है। इस वर्ष यह पारण 02 नवंबर को होगा। इस दिन व्रत खोलने का शुभ समय दोपहर 01:11 बजे से लेकर शाम 03:23 बजे तक है। व्रत खोलने से पहले सबसे पहले स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। इसके बाद तुलसी का दल या आंवला खाकर व्रत खोलना चाहिए। पारण के बाद ही सात्विक भोजन किया जा सकता है।
देवउठनी एकादशी का पारण इस वर्ष 02 नवंबर को द्वादशी तिथि को सूर्योदय के बाद किया जाएगा। इस दिन व्रत खोलने का शुभ समय दोपहर 01:11 बजे से शाम 03:23 बजे तक है।
एकादशी व्रत का पारण
देवउठनी एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि को सूर्योदय के बाद किया जाता है। इस वर्ष यह पारण 2 नवंबर को होगा। इस दिन व्रत खोलने का शुभ समय दोपहर 1:11 बजे से शाम 3:23 बजे तक है। व्रत खोलने से पहले सबसे पहले स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए और तुलसी का दल या आंवला खाकर व्रत का पारण करना चाहिए। इसके बाद ही सात्विक भोजन किया जा सकता है।
पारण की विधि
- द्वादशी तिथि को देवउठनी एकादशी व्रत का पारण विधिपूर्वक किया जाता है।
- सुबह जल्दी उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें
- स्नान के बाद घर और मंदिर की सफाई करें और सूर्य देव को अर्घ्य दें।
- भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करें, साथ ही ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें और भोग अर्पित करें।
- व्रत खोलने के लिए तुलसी का पत्ता खाएं या आंवला लें।
- पारण के तुरंत बाद भारी भोजन न करें, बल्कि हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन जैसे खिचड़ी, दलिया या फल लें।
- इसके साथ ही सामर्थ्य के अनुसार गरीबों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करना शुभ माना जाता है।
इन बातों का रखें ध्यान
- एकादशी के दिन कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
- इस दिन चावल का सेवन वर्जित है और किसी से वाद-विवाद नहीं करना चाहिए।
- काले रंग के कपड़े पहनने से बचें और किसी के बारे में नकारात्मक या गलत सोच न रखें।
- इसके साथ ही घर और मंदिर की सफाई पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
डिस्केलमर: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं विभिन्न माध्यमों/ ज्योतिषियों/ पंचांग/ प्रवचनों/ मान्यताओं/ धर्मग्रंथों पर आधारित हैं. MPNews इनकी पुष्टि नहीं करता है।
