भाद्रपद शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि 4 सितंबर को मां भुवनेश्वरी जयंती मनाई जाती है। मां भुवनेश्वरी चौदह भुवनों की स्वामिनी और दस महाविद्याओं में से एक मानी जाती हैं। मान्यता है कि इस दिन साधक उनकी गुप्त साधना करके सांसारिक और आध्यात्मिक सफलता प्राप्त करते हैं। मां की उपासना से रोग-शोक और मानसिक, शारीरिक तथा पारिवारिक कष्ट दूर होते हैं। मां भुवनेश्वरी की साधना से वाणी और व्यक्तित्व में तेज आता है, जिससे व्यक्ति सहज ही सबको आकर्षित करता है। साथ ही, घर में शांति, धन, सौभाग्य और लक्ष्मी की वृद्धि होती है।
चौदह भुवनों की स्वामिनी मां भुवनेश्वरी दस महाविद्याओं में से एक मानी जाती हैं। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि, 4 सितंबर को भुवनेश्वरी जयंती का उत्सव श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन मां भुवनेश्वरी की उपासना से साधक को सांसारिक सुख, वैभव और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
भुवनेश्वरी जयंती का महत्व
भुवनेश्वरी जयंती का विशेष महत्व है क्योंकि यह दिन देवी भुवनेश्वरी को समर्पित होता है, जो दस महाविद्याओं में से एक और चौदह भुवनों की अधिष्ठात्री मानी जाती हैं। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाई जाने वाली यह जयंती साधकों के लिए बेहद पावन मानी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन मां भुवनेश्वरी की आराधना और गुप्त साधना करने से साधक को सांसारिक सुख, सफलता और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। मां की कृपा से जीवन में समृद्धि आती है और साधक को सिद्धियां भी प्राप्त होती हैं। इसी कारण भुवनेश्वरी जयंती का दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ विशेष रूप से मनाया जाता है।
पूजा विधि
- भुवनेश्वरी जयंती पर पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।
- प्रातः स्नान कर लाल या गुलाबी वस्त्र धारण करके संकल्प लेने के बाद देवी भुवनेश्वरी की प्रतिमा या चित्र को स्वच्छ आसन पर स्थापित किया जाता है।
- पूजन के लिए जल, आम्रपल्लव, नारियल और सुपारी से कलश स्थापित कर दीप प्रज्वलित किया जाता है।
- इसके बाद लाल पुष्प, अक्षत और सिंदूर अर्पित कर देवी का ध्यान किया जाता है।
- भोग स्वरूप देवी को खीर और मिश्री अर्पित करने की परंपरा है।
- श्रद्धालु देवी भुवनेश्वरी के मंत्र का जाप कर उनसे आशीर्वाद की कामना करते हैं।
पूजा में ध्यान रखें ये बातें
- भाद्रपद शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि पर मां भुवनेश्वरी की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।
- मान्यता है कि इस दिन हवन में विशेष समिधाओं और सामग्री का प्रयोग करने से जीवन की कई समस्याओं का समाधान होता है।
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पीपल की समिधा से हवन करने पर जीवन की बाधाएं दूर होती हैं,
- इस दिन दूध और चावल से बनी खीर चढाने से कारोबार में तरक्की दिलाता है।
- बरगद की समिधा से हवन करने पर तर्क-वितर्क में विजय प्राप्त होती है और गूलर की समिधा से शत्रु परास्त होकर दोबारा सामने
- आने की हिम्मत नहीं करते। इसी प्रकार सरसों का होम किसी को भी वश में करने की शक्ति देता है।
- घी, मधु व शक्कर से बनी खीर का होम करने पर मनचाहा ट्रांसफर, नौकरी में तरक्की और मनचाही जॉब प्राप्त होती है।
डिस्केलमर: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं विभिन्न माध्यमों/ ज्योतिषियों/ पंचांग/ प्रवचनों/ मान्यताओं/ धर्मग्रंथों पर आधारित हैं. MPNews इनकी पुष्टि नहीं करता है।
