आज है गुरु प्रदोष व्रत, शिव कृपा पाने का विशेष अवसर; जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

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Published On: 1 January 2026

प्रदोष व्रत हर माह की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है, जो शुक्ल और कृष्ण पक्ष में दो बार आता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा-अर्चना का विधान है। प्रदोष व्रत में संध्या काल यानी सूर्यास्त के बाद के समय को अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि इसी दौरान प्रदोष काल होता है। मान्यता है कि जब त्रयोदशी तिथि और प्रदोष काल एक साथ आते हैं, तब शिव पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। सप्ताह के जिस दिन प्रदोष व्रत पड़ता है, उसी दिन के नाम से इसे जाना जाता है। इस बार प्रदोष व्रत गुरुवार को पड़ रहा है, इसलिए इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाएगा, जिसका विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।

आज गुरु प्रदोष व्रत रखा जाएगा, जो भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत शुभ धार्मिक आयोजन है। इस दिन विशेष रूप से भगवान शिव की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करने से जीवन में सुख, समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।

गुरु प्रदोष व्रत

हिन्दू पंचांग के अनुसार, गुरु प्रदोष व्रत रखा गया, क्योंकि त्रयोदशी तिथि गुरुवार के दिन पड़ रही है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा की जाती है और संध्या के समय प्रदोष काल में भक्त उपवास रखते हैं। जब प्रदोष व्रत गुरुवार के दिन आता है, तो इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाता है, जो ज्ञान, धर्म, सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्ति का विशेष शुभ समय माना जाता है। इस अवसर पर शिवलिंग का अभिषेक, बेलपत्र अर्पण और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप विशेष रूप से फलदायी समझा जाता है।

महत्व

गुरु प्रदोष का व्रत आज रखा जाएगा, जिसे गुरुवार के दिन पड़ने के कारण गुरु प्रदोष या बृहस्पति प्रदोष कहा जाता है। यह व्रत आध्यात्मिक उन्नति और धर्मज्ञान की प्राप्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। मान्यता है कि गुरु प्रदोष व्रत करने से ज्ञान, शिक्षा, धन, धर्म और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। पुराणों के अनुसार त्रयोदशी की रात के पहले प्रहर में भेंट के साथ भगवान शिव की प्रतिमा के दर्शन करने से व्यक्ति की सभी समस्याओं का समाधान निकलता है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है।

शुभ मुहूर्त

गुरु प्रदोष व्रत पौष माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाएगा। त्रयोदशी तिथि का आरंभ 1 जनवरी को मध्यरात्रि 1 बजकर 47 मिनट से होगा और इसका समापन उसी दिन रात 10 बजकर 22 मिनट पर होगा। इस दिन प्रदोष काल शाम 5 बजकर 35 मिनट से रात 8 बजकर 19 मिनट तक रहेगा, जिसे गुरु प्रदोष पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।

पूजा विधि

  • इस दिन भक्त प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं और व्रत का संकल्प लेते हैं।
  • शाम को प्रदोष काल में घर या मंदिर में भगवान शिव की पूजा की जाती है।
  • शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक कर बेलपत्र, धतूरा, भस्म, पुष्प और फल अर्पित किए जाते हैं।
  • इसके बाद दीपक जलाकर “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप किया जाता है और गुरु प्रदोष व्रत कथा का पाठ किया जाता है।
  • अंत में आरती कर भगवान शिव और माता पार्वती से सुख-समृद्धि, ज्ञान और कष्टों से मुक्ति की कामना की जाती है।

डिस्केलमर: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं विभिन्न माध्यमों/ ज्योतिषियों/ पंचांग/ प्रवचनों/ मान्यताओं/ धर्मग्रंथों पर आधारित हैं. MPNews इनकी पुष्टि नहीं करता है।

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