आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को इंदिरा एकादशी के नाम से जाना जाता है। हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इसे करने से पापों का नाश और भगवान की कृपा प्राप्त होती है। इंदिरा एकादशी का विशेष महत्व इस बात में है कि यह पितृपक्ष के दौरान आती है। इस दिन उन पितरों का श्राद्ध भी किया जाता है जिनकी मृत्यु कृष्ण या शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि में हुई थी। पूर्ण श्रद्धा और नियमों के साथ व्रत करने से पितरों की कृपा, भगवान विष्णु का आशीर्वाद और पितृ ऋण से मुक्ति मिलती है।
इंदिरा एकादशी का व्रत हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी और महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत विशेष रूप से पितृ पक्ष के दौरान, आश्विन माह के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को किया जाता है। इसे पितृ एकादशी भी कहा जाता है।
महत्व
इंदिरा एकादशी का व्रत हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। यह एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होती है और इसे करने से साधक के सभी पाप नष्ट होते हैं। मान्यता है कि इस दिन उपवास और पूजा करने से मन, शरीर और आत्मा की शुद्धि होती है तथा जीवन में सुख, समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।गरुड़ पुराण के अनुसार, इंदिरा एकादशी का व्रत जन्म-जन्मांतर के पापों को नष्ट करता है और मृत्यु के बाद आत्मा को उच्च लोक में स्थान दिलाता है। यह व्रत पितरों को नरक से मुक्ति दिलाकर वैकुंठ लोक की प्राप्ति कराता है। इस दिन पितरों का तर्पण और पिंडदान करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है। इंदिरा एकादशी का व्रत विधिपूर्वक करने से न केवल पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है, बल्कि व्रती का जीवन भी कल्याणमय बनता है।
शुभ मुहूर्त
इंदिरा एकादशी 2025 इस साल 17 सितंबर, बुधवार को है। इस दिन की एकादशी तिथि सुबह 12:21 बजे से शुरू होकर रात 11:39 बजे समाप्त होगी। इस विशेष दिन को भगवान विष्णु को समर्पित व्रत के रूप में मनाया जाता है और इसे करने से धार्मिक मान्यता अनुसार पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
पूजा विधि
- इंदिरा एकादशी के दिन भक्त प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लेते हैं।
- इस दिन भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाकर धूप, फूल, तुलसी और पंचामृत से पूजा की जाती है।
- श्रीहरि को पीले वस्त्र और मौसमी फल अर्पित किए जाते हैं।
- इस दिन विष्णु सहस्रनाम या विष्णु मंत्र का जाप किया जाता है।
- दिनभर उपवास रखते हुए पितरों का स्मरण किया जाता है।
- शाम को कथा सुनने के बाद भोग अर्पित कर प्रसाद ग्रहण किया जाता है।
व्रत का पारण
इंदिरा एकादशी व्रत का पारण 18 सितंबर, गुरुवार को सुबह 6:07 से 8:34 बजे के बीच किया जा सकता है। व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना अनिवार्य है, जो इस दिन रात 11:24 बजे समाप्त होगी।
डिस्केलमर: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं विभिन्न माध्यमों/ ज्योतिषियों/ पंचांग/ प्रवचनों/ मान्यताओं/ धर्मग्रंथों पर आधारित हैं. MPNews इनकी पुष्टि नहीं करता है।
