सनातन धर्म में पौष शुक्ल पक्ष की एकादशी को पौष पुत्रदा एकादशी कहा जाता है, जिसे अत्यंत पुण्यदायी और कल्याणकारी माना जाता है। इस वर्ष यह एकादशी 30 दिसंबर, मंगलवार को पड़ रही है, यानी साल के अंतिम दिन। वैदिक पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 30 दिसंबर की सुबह 7:50 बजे से आरंभ हो रही है, इसलिए गृहस्थ परंपरा के अनुसार इसी दिन व्रत करना शास्त्रसम्मत माना गया है। यह व्रत भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित है, जिन्हें पालनकर्ता, करुणामय और मोक्षदाता माना जाता है।
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को अत्यंत पवित्र और फलदायी माना जाता है। हर महीने कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में एक-एक एकादशी आती है, और प्रत्येक एकादशी का अपना विशेष धार्मिक महत्व होता है। इस माह पौष के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी को पुत्रदा एकादशी कहा जाता है, जिसे विशेष रूप से संतान सुख और वंश वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
पुत्रदा एकादशी व्रत
हिन्दू धर्म में एकादशी व्रत को अत्यंत पवित्र माना जाता है। हर महीने कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में एक-एक एकादशी आती है, जिनका अपना-अपना धार्मिक महत्व होता है। पौष महीने की शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को पुत्रदा एकादशी कहा जाता है। इस दिन विशेष रूप से पुत्र की प्राप्ति और संतान के कल्याण के लिए व्रत किया जाता है। श्रद्धालु इस व्रत में उपवास रखते हैं और भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना कर पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं।
महत्व
आज देशभर में मनोरथों की सिद्धि और संतान की प्राप्ति के लिए पुत्रदा एकादशी व्रत श्रद्धापूर्वक मनाया जा रहा है। आध्यात्मिक गुरु और पंडितों के अनुसार, यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और विशेष रूप से उन माता‑पिता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है जो मंगलमयी संतान की कामना रखते हैं। मान्यता है कि जिस घर में पुत्रदा एकादशी का संकल्प और व्रत विधिपूर्वक किया जाता है, वहाँ लक्ष्मी‑नारायण की कृपा से संतानों का कल्याण होता है तथा परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।
पौराणिक कथा
पौष मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में भद्रावती के राजा सुकर्मा और रानी शैव्या संतानहीन थे। उन्होंने अनेक यज्ञ और तप किए, लेकिन संतान सुख नहीं प्राप्त हुआ। अंततः ऋषियों की सलाह पर उन्होंने पूर्ण श्रद्धा और ब्रह्मचर्य के साथ पुत्रदा एकादशी का व्रत किया। व्रत और रात्रि जागरण के दौरान भगवान विष्णु ने उन्हें स्वप्न में दर्शन देकर एक धर्मात्मा और यशस्वी पुत्र देने का वरदान दिया। इसके कुछ समय बाद रानी शैव्या ने पुत्र को जन्म दिया और तभी से यह एकादशी “पुत्रदा” के नाम से प्रसिद्ध हुई।
शुभ मुहूर्त
पौष मास की पुत्रदा एकादशी 30 दिसंबर 2025 को शुरू होकर 31 दिसंबर की सुबह 5 बजे तक रहेगी। इस दिन एकादशी तिथि सुबह 7:50 बजे प्रारंभ होगी। सूर्योदय सुबह 7:13 बजे और सूर्यास्त शाम 5:34 बजे होगा। यह व्रत संतान सुख और परिवार में समृद्धि लाने के लिए विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।
पूजा विधि
- पौष महीने की पुत्रदा एकादशी पर व्रतियों को सुबह स्नान कर सात्त्विक वस्त्र पहनने की सलाह दी जाती है।
- पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध कर भगवान श्री विष्णु या लक्ष्मी-नारायण की प्रतिमा स्थापित की जाती है।
- तुलसी के पत्ते, पीले पुष्प और धूप-दीप अर्पित कर “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए।
- इस दिन विष्णु सहस्रनाम या एकादशी व्रत कथा का पाठ किया जाता है।
- दिनभर संयम, मौन, भजन-कीर्तन तथा भगवान विष्णु का नाम स्मरण करना व्रति के लिए लाभकारी माना जाता है।
डिस्केलमर: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं विभिन्न माध्यमों/ ज्योतिषियों/ पंचांग/ प्रवचनों/ मान्यताओं/ धर्मग्रंथों पर आधारित हैं. MPNews इनकी पुष्टि नहीं करता है।
