रोहिणी व्रत पर करें भगवान वासुपूज्य की भक्ति, पाएं जीवन में सुख-संपत्ति; जानें महत्व और शुभ मुहूर्त

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Published On: 28 January 2026

जैन धर्म में रोहिणी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। यह पावन पर्व भगवान वासुपूज्य स्वामी को समर्पित होता है, जिसमें श्रद्धालु भक्ति भाव से उनकी पूजा-अर्चना करते हैं और सुख-समृद्धि व सौभाग्य की कामना के साथ व्रत रखते हैं। यह व्रत स्त्री और पुरुष दोनों ही करते हैं। मान्यता है कि रोहिणी व्रत के पुण्य-प्रताप से विवाहित महिलाओं के जीवन में सुख और सौभाग्य की वृद्धि होती है, जबकि अविवाहित लोगों के विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होकर शीघ्र विवाह के योग बनते हैं।

रोहिणी व्रत आज रखा जाएगा, इस दिन रोहिणी नक्षत्र पूरे दिन रहेगा और यह व्रत इसी नक्षत्र के आधार पर किया जाता है, इसलिए श्रद्धालु सुबह से लेकर रात तक उपवास और पूजा-अर्चना करते हैं। रोहिणी व्रत का उद्देश्य परिवार की खुशहाली, स्वास्थ्य और विशेष रूप से पति की लंबी आयु की कामना करना माना जाता है।

रोहिणी व्रत

जैन धर्म में रोहिणी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है, जो भगवान वासुपूज्य स्वामी को समर्पित है। यह व्रत स्त्री और पुरुष दोनों द्वारा सुख-सौभाग्य, दांपत्य जीवन की खुशहाली और शीघ्र विवाह की कामना से किया जाता है। इस वर्ष रोहिणी व्रत 28 जनवरी को माघ शुक्ल दशमी तिथि के दिन मनाया जाएगा। इस दिन सुबह 09:27 बजे से रोहिणी नक्षत्र का संयोग बन रहा है, वहीं ब्रह्म योग, इंद्र योग और सर्वार्थ सिद्धि योग जैसे शुभ योग भी रहेंगे। मान्यता है कि इन विशेष योगों में विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

महत्व

रोहिणी व्रत हिन्दू धर्म में एक विशेष व्रत है जो विशेष रूप से महिलाओं द्वारा माता पार्वती और भगवान शनि की कृपा प्राप्त करने के लिए रखा जाता है। यह व्रत रोहिणी नक्षत्र वाले दिन मनाया जाता है और माना जाता है कि इसे करने से पति की लंबी उम्र, परिवार में सुख-शांति और जीवन में समृद्धि आती है। महिलाएँ इस दिन सूर्योदय से पहले स्नान कर व्रत की शुरुआत करती हैं, माता पार्वती और शनि देव की पूजा करती हैं और निर्जला व्रत रखकर संकल्प पूरा करती हैं। इस अवसर पर प्रसाद और मिठाई बांटी जाती है और व्रती पूरी भक्ति और नियम के साथ व्रत का पालन करती हैं।

शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार, 28 जनवरी को माघ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि है, जो शाम 04 बजकर 35 मिनट तक रहेगी, उसके बाद एकादशी तिथि प्रारंभ होगी। इसी दिन रोहिणी व्रत मनाया जाएगा, जिसमें रोहिणी नक्षत्र सुबह 09 बजकर 27 मिनट से रहेगा। इस शुभ अवसर पर व्रती अपनी सुविधा अनुसार समय लेकर परम पूज्य भगवान वासु स्वामी की पूजा कर सकते हैं।

पूजा विधि

  • रोहिणी व्रत हिन्दू धर्म में विशेष रूप से महिलाएँ और नवविवाहित दंपति करते हैं।
  • यह व्रत भगवान श्रीकृष्ण और राधा जी की आराधना के लिए मनाया जाता है।
  • इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान के बाद साफ-सुथरे स्थान पर पूजा का मंडप सजाया जाता है।
  • पूजा में रोहिणी नक्षत्र के अनुसार फल, मिठाई, दूध, दीपक और फूल अर्पित किए जाते हैं।
  • व्रत में सूर्योदय से पहले ब्राह्मणों को भोजन कराना और भगवान की कथा सुनना शुभ माना जाता है।
  • इसके अलावा महिलाएँ व्रत के दौरान उपवास रखकर भगवान श्रीकृष्ण और राधा जी की आराधना करती हैं।
  • रोहिणी व्रत को विधिपूर्वक करने से घर में सौभाग्य और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

डिस्केलमर: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं विभिन्न माध्यमों/ ज्योतिषियों/ पंचांग/ प्रवचनों/ मान्यताओं/ धर्मग्रंथों पर आधारित हैं. MPNews इनकी पुष्टि नहीं करता है।

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