आज भाद्रपद शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि है, जो शुक्रवार के दिन पड़ रही है। शुभ प्रदोष व्रत वैदिक पंचांग के अनुसार, 05 सितंबर को प्रदोष व्रत रखा जाएगा। यह दिन भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधिपूर्वक शिव की पूजा-अर्चना करने से साधक के जीवन में खुशियाँ आती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
5 सितंबर को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि है। इस दिन शुक्रवार होने के कारण प्रदोष व्रत को शुभ प्रदोष व्रत भी कहा जाएगा, जिसे धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विशेष फलदायी माना जाता है।
शुक्र प्रदोष व्रत
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 5 सितंबर, 2025 को शुक्र प्रदोष व्रत मनाया जाएगा। यह व्रत भगवान शिव और देवी पार्वती को समर्पित होता है और इसे करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन विधिपूर्वक पूजा और उपासना करने से पितृ दोष और कालसर्प दोष का निवारण होता है और सभी कार्यों में सफलता मिलती है। भक्त सुबह से ही उपवास रखते हैं और शाम को प्रदोष काल में शिव पूजा करते हैं।
महत्व
5 सितंबर 2025 को, शुक्र प्रदोष व्रत मनाया जाएगा। यह व्रत भगवान शिव की विशेष पूजा के लिए प्रसिद्ध है और इसे करने से जीवन में सुख-समृद्धि और शांति आती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, अगर आप महादेव का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं, तो प्रदोष व्रत के दिन पूजा के समय शिव तांडव स्त्रोत का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस स्त्रोत का पाठ करने से पितृ दोष और कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है और सभी कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। साथ ही यह मन को शांत और स्थिर बनाए रखता है।
शुभ मुहूर्त
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, 5 सितंबर को शुक्र प्रदोष व्रत का आयोजन किया जाएगा। इस दिन शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं: ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:52 से 05:38 तक, संध्या मुहूर्त सुबह 05:15 से 06:24 तक और अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:12 से 01:02 तक रहेगा। विशेष रूप से प्रदोष काल में पूजा करने का शुभ समय शाम 06:50 से 07:59 तक है। इन समयों में विधिपूर्वक भगवान शिव की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास माना जाता है।
पूजा विधि
- प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा का सबसे शुभ समय शाम का प्रदोष काल माना जाता है।
- इस बार 5 सितंबर को शाम 06:50 बजे से 07:59 बजे तक रहेगा।
- इस दिन सुबह और शाम दोनों समय पूजा करना लाभकारी है, लेकिन विशेष रूप से शाम का समय अत्यंत शुभ माना जाता है।
- पूजा से पूर्व स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और उसके बाद भगवान शिव का पूजन शुरू करें।
- पूजा में शिवलिंग को जल से अभिषेक करना, फूल, अक्षत, बेलपत्र, भांग और धतूरा अर्पित करना शामिल है।
- इसके साथ ही शिव चालीसा और मंत्रों का जाप करें और प्रदोष व्रत की कथा का पाठ करें।
- पूजा समाप्त होने पर भगवान शिव की आरती करें और प्रसाद का वितरण अवश्य करें।
डिस्केलमर: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं विभिन्न माध्यमों/ ज्योतिषियों/ पंचांग/ प्रवचनों/ मान्यताओं/ धर्मग्रंथों पर आधारित हैं. MPNews इनकी पुष्टि नहीं करता है।
