आज है माघ पूर्णिमा का पावन पर्व, करे स्नान और दान, जानें धार्मिक महत्व

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Published On: 1 February 2026

माघ पूर्णिमा का पावन पर्व 1 फरवरी 2026 को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। इस दिन गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करने, व्रत रखने, दान-पुण्य और पूजा-पाठ का विशेष महत्व होता है। माघी पूर्णिमा को पुत्र प्राप्ति और सौभाग्य बढ़ाने वाला व्रत माना गया है। माघ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर श्रद्धालु प्रातःकाल शुभ मुहूर्त में स्नान कर सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं, फिर भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और अन्य देवी-देवताओं की विधि-विधान से पूजा करते हैं। इस दिन अन्न, वस्त्र, तिल, घी और धन का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का वास माना जाता है।

माघ पूर्णिमा का पावन पर्व 1 फरवरी को मनाया जाएगा और यह माघ मास की अंतिम पूर्णिमा है, जिसे हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जाता है। इस दिन स्नान-दान, पवित्र नदी में गंगा स्नान, दान पुण्य और भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी तथा चंद्र देव की विशेष पूजा का विशेष महत्व है।

माघ पूर्णिमा

माघ पूर्णिमा हिंदू धर्म में एक पावन और विशेष तिथि मानी जाती है। इस दिन श्रद्धालु गंगा, यमुना सहित पवित्र नदियों में स्नान कर दान-पुण्य करते हैं, जिससे पापों से मुक्ति और पुण्य की प्राप्ति मानी जाती है। माघ मास में किया गया स्नान, जप और दान अत्यंत फलदायी होता है, इसलिए देशभर के तीर्थस्थलों पर बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। प्रयागराज, वाराणसी, हरिद्वार जैसे स्थानों पर विशेष स्नान पर्व और धार्मिक अनुष्ठान होते हैं। मान्यता है कि माघ पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से सुख-समृद्धि और शांति का आशीर्वाद मिलता है।

धार्मिक महत्व

माघ पूर्णिमा का हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक महत्व है। यह पर्व माघ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाया जाता है और इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान और पूजा-पाठ का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि माघ पूर्णिमा पर गंगा, यमुना, सरस्वती जैसी नदियों में स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है, साथ ही सत्यनारायण कथा का पाठ भी शुभ फलदायी माना जाता है। माघ पूर्णिमा को कल्पवास का समापन भी माना जाता है, इसलिए प्रयागराज सहित कई तीर्थस्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है और यह दिन आध्यात्मिक शांति व मोक्ष की कामना के लिए बेहद खास माना जाता है।

शुभ मुहूर्त

माघ पूर्णिमा 2026 इस वर्ष श्रद्धा और आस्था के साथ 1 फरवरी को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 1 फरवरी 2026 को सुबह 05:52 बजे होगी, जबकि इसका समापन 2 फरवरी को सुबह 03:38 बजे होगा। उदयातिथि की मान्यता के अनुसार जिस दिन सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि होती है, उसी दिन व्रत रखा जाता है, इसलिए माघ पूर्णिमा का व्रत 1 फरवरी 2026 को ही किया जाएगा।

पूजा विधि

  • माघ पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाती है,
  • साथ ही देवी लक्ष्मी, भगवान शिव और चंद्रदेव की आराधना भी अत्यंत शुभ मानी जाती है।
  • इस पावन तिथि पर भगवान सत्यनारायण की कथा कराना पुण्यदायी होता है।
  • पूजा में धूप-दीप, तुलसी, पान, सुपारी, रोली-मोली, तिल और दूर्वा अर्पित कर भगवान विष्णु की उपासना की जाती है।
  • पंचामृत का भोग लगाया जाता है। प्रसाद के रूप में आटे को भूनकर उसमें शक्कर और केले की फली मिलाकर पंजीरी बनाई जाती है।
  • जिसे भगवान को अर्पित कर व्रती स्वयं ग्रहण करते हैं और प्रसाद के रूप में वितरित भी करते हैं।
  • इस दिन सुबह और सूर्यास्त के बाद भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की पूजा अवश्य करनी चाहिए।
  • साथ ही भगवान शिव, चंद्रदेव और माता गंगा की आरती व स्तुति का पाठ करने से विशेष शुभ फल की प्राप्ति होती है।

डिस्केलमर: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं विभिन्न माध्यमों/ ज्योतिषियों/ पंचांग/ प्रवचनों/ मान्यताओं/ धर्मग्रंथों पर आधारित हैं. MPNews इनकी पुष्टि नहीं करता है।

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