MP में नर्सिंग शिक्षा का स्तर लगातार गिर रहा है। प्रदेश के 12 शासकीय नर्सिंग कॉलेज आज भी मान्यता से वंचित हैं। NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने आरोप लगाया है कि इन कॉलेजों में शैक्षणिक संरचना की कमी, फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र, नियुक्तियों में धांधली और नर्सिंग काउंसिल के नियमों की अनदेखी की जा रही है। एनएसयूआई ने अगस्त 2025 में 13 शासकीय नर्सिंग कॉलेजों की शिकायत की थी ताकि 2025-26 सत्र की मान्यता दी जा सके, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
इसके कारण कई कॉलेज बंद होने की कगार पर हैं। इनमें प्राचार्य, उप-प्राचार्य और फैकल्टी की भारी कमी है, कई कॉलेजों में केवल एक या दो फैकल्टी ही कार्यरत हैं।
मान्यता से वंचित कॉलेज
- रायसेन- प्राचार्य, उप प्राचार्य और असिस्टेंट प्रोफेसर नहीं।
नरेंद्र शिवाजी पटेल, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री - मंदसौर- केवल 5 फैकल्टी कार्यरत, अन्य पद खाली।
जगदीश देवड़ा, उप मुख्यमंत्री - नरसिंहपुर- उप प्राचार्य, एसोसिएट व असिस्टेंट प्रोफेसर का अभाव।
प्रहलाद पटेल, पंचायत एवं ग्राम विकास मंत्री
उदय प्रताप सिंह, परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री - जबलपुर (आयुर्वेदा कॉलेज)- केवल 2 फैकल्टी कार्यरत, अन्य पद रिक्त।
राकेश सिंह, लोक निर्माण मंत्री - राजगढ़ जीएनएम स्कूल- प्राचार्य, उप प्राचार्य और असिस्टेंट प्रोफेसर नहीं।
नारायण सिंह पंवार, मछुआ कल्याण मंत्री
गोतम टेटवाल, कौशल विकास मंत्री - बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज, सागर- उप-प्राचार्य और फैकल्टी का अभाव।
गोविंद सिंह राजपूत, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री - खंडवा स्कूल ऑफ नर्सिंग- प्राचार्य, उप प्राचार्य और असिस्टेंट प्रोफेसर नहीं।
विजय शाह, जनजातीय कार्य मंत्री - इंदिरा गांधी नेशनल ट्राइबल यूनिवर्सिटी, अमरकंटक- 50 सीटों पर केवल 1 फैकल्टी।
दिलीप जायसवाल, कुटीर एवं ग्रामोद्योग मंत्री - भोपाल आयुर्वेदा कॉलेज- प्राचार्य नहीं, फैकल्टी में गड़बड़ी, फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र।
विश्वास सारंग, सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री
कृष्णा गौर, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री - झाबुआ जीएनएम स्कूल- प्राचार्य, उप प्राचार्य और फैकल्टी रिक्त।
निर्मला भूरिया, महिला एवं बाल विकास मंत्री - सीधी जीएनएम स्कूल- प्राचार्य, उप प्राचार्य और फैकल्टी रिक्त।
रीति पाठक, विधायक एवं पूर्व सांसद - दतिया स्कूल ऑफ नर्सिंग- प्राचार्य और फैकल्टी नहीं, अकादमिक संरचना शून्य।
नरोत्तम मिश्रा, पूर्व मंत्री
NSUI की मांगें
- सभी शासकीय नर्सिंग कॉलेजों की स्वतंत्र उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए।
- फर्जी नियुक्तियों और अनुभव प्रमाण पत्र देने वाली फैकल्टी पर एफआईआर दर्ज की जाए।
- नर्सिंग शिक्षा बचाने के लिए कड़े और पारदर्शी कदम उठाए जाएं।
- जिम्मेदार अधिकारियों पर तत्काल कार्यवाही कर उनका वेतन रोका जाए।
रवि परमार का बयान
एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने कहा कि सरकार की लापरवाही के कारण हजारों गरीब परिवार की छात्राएं नर्सिंग कॉलेजों में प्रवेश से वंचित रह जाएंगी। वे कहते हैं कि कहीं न कहीं प्राइवेट नर्सिंग कॉलेजों को मुनाफा पहुंचाने के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों की सांठ-गांठ दिखती है। इन 12 कॉलेजों में लगभग 1,000 से अधिक सीटें हैं। परमार ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने तुरंत कार्रवाई नहीं की तो छात्रहित में प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
