लोक निर्माण विभाग की नागौद से मैहर तक बन रही करीब 150 करोड़ रुपये की सड़क परियोजना इन दिनों सुर्खियों में है, लेकिन वजह विकास नहीं बल्कि गुणवत्ता पर उठते गंभीर सवाल हैं। दो जिलों को जोड़ने वाली इस अहम सड़क को क्षेत्र की जीवनरेखा बताया जा रहा था, मगर निर्माण की जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। स्थानीय स्तर पर सामने आए तथ्यों के मुताबिक सड़क निर्माण में परसमनिया पहाड़ से निकाले गए सॉफ्ट चिप्स स्टोन जैसे नरम पत्थरों को पीसकर इस्तेमाल किया जा रहा है।
नियमों के अनुसार, जिस WMM प्लांट से सामग्री तैयार होनी चाहिए, वह प्रक्रिया पूरी किए बिना ही सूखी गिट्टी से काम चलाया जा रहा है। ऊपर से घटिया गिट्टी और डामर की परत बिछाकर सड़क को कागजों में दुरुस्त दिखाया जा रहा है।
नागौद-मैहर मार्ग पर गुणवत्ता से खिलवाड़
निर्माण कार्य पर निगरानी रखने वाले प्रभारी एसडीओ की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि उनकी कथित शह पर डीपीआर के तय मानकों को दरकिनार कर काम आगे बढ़ाया जा रहा है। तकनीकी नियमों की अनदेखी से सड़क की उम्र शुरू होने से पहले ही कम होती नजर आ रही है। इस परियोजना में काम कर रहा ठेकेदार पहले भी विवादों में रहा है। पन्ना जिले की सकरिया-ककरहटी-गुनौर-डिघौरा और पहाड़ीखेड़ा सड़कों में घटिया निर्माण के कारण कुछ ही महीनों में सड़कें उखड़ गई थीं। उस समय सरकार को भारी आलोचना झेलनी पड़ी थी। अब वही ठेकेदार एक बार फिर बड़े प्रोजेक्ट में वही तरीका अपनाता दिख रहा है।
इंजीनियरों की भूमिका पर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि विभागीय इंजीनियरों की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा खेल संभव नहीं। यदि इस सड़क की निष्पक्ष तकनीकी जांच हो, तो कई जिम्मेदार अधिकारी और ठेकेदार कठघरे में खड़े नजर आ सकते हैं। मुख्यमंत्री और विभागीय मंत्री इंजीनियरों की तकनीकी दक्षता बढ़ाने के लिए लगातार कार्यशालाओं की बात करते हैं, मगर नागौद क्षेत्र में इनका असर जमीन पर नहीं दिखता। यहां जनता का पैसा खर्च हो रहा है, लेकिन बदले में टिकाऊ सड़क मिलने की उम्मीद कमजोर पड़ती जा रही है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार भी मामला दबा दिया जाएगा या फिर जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो नई सड़कें बनने से पहले ही उखड़ती नजर आएंगी। जवाब आने तक जनता सिर्फ इंतजार ही कर सकती है।
