आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) जबलपुर ने यात्री बसों की टैक्स चोरी के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए गुरुवार रात बस मालिकों और परिवहन विभाग के एक कर्मचारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस पूरे प्रकरण से शासन को करीब नौ करोड़ रुपए की आर्थिक क्षति पहुंची है। मामला सामने आते ही परिवहन महकमे में हड़कंप मच गया है।
ईओडब्ल्यू ने डिंडोरी जिले के बस संचालक संजय केशवानी और साधना केशवानी के साथ ही जिला परिवहन कार्यालय डिंडोरी में पदस्थ (वर्तमान में नरसिंहपुर में पदस्थ) लिपिक पुष्प कुमार प्रधान के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 318(4), 61(2), 238(सी) और धारा 7(सी) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की गहन जांच की जा रही है।
जबलपुर EOW की बड़ी कार्रवाई
जानकारी के अनुसार इस मामले की शुरुआत भोपाल से प्राप्त शिकायत के बाद हुई। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि संजय और साधना केशवानी के नाम पर पंजीकृत यात्री बसों पर भारी टैक्स बकाया होने के बावजूद उन्हें परमिट और फिटनेस प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए। यह भी आरोप है कि विभागीय स्तर पर मिलीभगत के चलते नियमों को नजरअंदाज किया गया।
जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य
प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि लंबे समय से टैक्स बकाया रहने के बावजूद बसों का संचालन जारी रहा। परमिट और फिटनेस सर्टिफिकेट जारी किए जाने की प्रक्रिया में दस्तावेजों की अनदेखी की गई। ईओडब्ल्यू अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल है। विभागीय रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं और संबंधित अधिकारियों से पूछताछ की तैयारी की जा रही है।
आगे और खुलासों की संभावना
ईओडब्ल्यू अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो संबंधित आरोपियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा की जा सकती है, ताकि भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके।
