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2026 बनेगा MP का कृषि टर्निंग पॉइंट, आयोजन नहीं बल्कि किसान की कमाई बढ़ाने का एजेंडा

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Published On: 4 January 2026

MP सरकार ने वर्ष 2026 को ‘कृषि वर्ष’ घोषित करते हुए साफ कर दिया है कि यह महज सरकारी उत्सव या औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहेगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इस पहल का असली मकसद किसानों की आय बढ़ाना, ग्रामीण रोजगार खड़ा करना और खेती को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ना है। इसके लिए सरकार ने तीन साल का ठोस रोडमैप तैयार किया है।

शनिवार को मुख्यमंत्री निवास में हुई समीक्षा बैठक में खेती से जुड़े सभी विभागों को एक मंच पर लाने का फैसला लिया गया। कृषि, सहकारिता, पशुपालन, उद्यानिकी, खाद्य प्रसंस्करण, मत्स्य और ऊर्जा विभाग अब अलग-अलग दिशा में नहीं, बल्कि एक साझा लक्ष्य के साथ काम करेंगे, ताकि योजनाओं का सीधा लाभ किसान तक पहुंचे।

MP का किसान

किसानों की सोच और क्षमता बढ़ाने के लिए सरकार प्रशिक्षण और एक्सपोजर विजिट पर खास जोर दे रही है। प्रदेश और संभाग स्तर पर ट्रेनिंग के साथ किसानों को इजराइल और ब्राजील जैसे देशों में आधुनिक खेती, तकनीक और पशुपालन के मॉडल देखने भेजा जाएगा। उद्देश्य है कि किसान नई तकनीक को अपनाकर अपनी उपज और मुनाफा दोनों बढ़ा सके। सरकार ने साफ किया है कि 2026 के कृषि वर्ष से जुड़ी हर योजना का अंतिम पैमाना किसान की आमदनी होगी। खेती को केवल उत्पादन तक सीमित न रखकर बाजार, प्रोसेसिंग और निर्यात से जोड़ा जाएगा, ताकि उपज का सही मूल्य मिल सके और बिचौलियों की भूमिका कम हो।

मशीन, डिजिटल खेती और सिंचाई

खेती की लागत घटाने के लिए यंत्रीकरण को बढ़ावा दिया जाएगा। माइक्रो इरिगेशन सिस्टम से पानी की बचत और उत्पादन बढ़ाने की योजना है। इसके साथ ही एग्री स्टेक और डिजिटल कृषि को गांव स्तर तक उतारने की तैयारी है, जिससे किसान तकनीक से सीधे जुड़ेगा। छोटे किसानों को मजबूत करने के लिए एफपीओ को केंद्र में रखा गया है। इन्हें खेती के साथ दुग्ध उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण और मार्केटिंग से जोड़ा जाएगा, ताकि सामूहिक शक्ति बने और किसान बाजार में मजबूत सौदेबाजी कर सके।

कर्ज, बाजार और रोजगार

कम ब्याज दर पर ऋण, बेहतर बाजार नेटवर्क और मंडियों का आधुनिकीकरण इस योजना का अहम हिस्सा है। e-NAM से जुड़ी मंडियों में ग्रेडिंग और पैकेजिंग की सुविधा होगी। साथ ही फूड प्रोसेसिंग, उद्यानिकी और कृषि आधारित उद्योगों से ग्रामीण इलाकों में रोजगार बढ़ाने पर जोर रहेगा। जलवायु परिवर्तन को देखते हुए प्राकृतिक खेती, जैविक खेती और श्रीअन्न उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। फूलों की खेती, पशुपालन, दुग्ध और मछली पालन को वैकल्पिक आय स्रोत के रूप में विकसित किया जाएगा। सरकार का मानना है कि समन्वय से ही ‘समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश’ का सपना साकार होगा।

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