,

40 करोड़ की भोपाल निगम इमारत में ‘मौत का कुआं’ जैसी डिजाइन, फिर सवालों में लिंक रोड-2 की बिल्डिंग

Author Picture
Published On: 8 February 2026

भोपाल के लिंक रोड नंबर-2 पर बनी नगर निगम की आठ मंजिला इमारत एक बार फिर विवादों में है। करीब 40 करोड़ रुपए की लागत से तैयार इस भवन में खराब इंजीनियरिंग का एक और गंभीर उदाहरण सामने आया है। सीढ़ियों के पास बना खुला एरिया किसी भी वक्त हादसे की वजह बन सकता है। हैरानी की बात यह है कि इसी इमारत में अब कार्यालयों की शिफ्टिंग भी शुरू हो चुकी है।

इमारत के पिछले हिस्से में ऊपर-नीचे जाने के लिए बनाई गई सीढ़ियों के ठीक पास एक ओपन एरिया है। यह जगह गेट से सटी हुई है, लेकिन न तो यहां कोई दीवार बनाई गई है और न ही सुरक्षा जाली लगाई गई है। जानकारों का कहना है कि इस तरह की डिजाइन किसी ‘मौत के कुएं’ से कम नहीं है, जहां एक छोटी सी चूक जानलेवा साबित हो सकती है।

भोपाल निगम इमारत

यह पहली बार नहीं है जब इस बिल्डिंग की डिजाइन पर सवाल उठे हों। 5 एकड़ जमीन में बनी इस इमारत में इससे पहले मीटिंग हॉल को लेकर बड़ी लापरवाही सामने आई थी। करोड़ों रुपए खर्च कर भवन तो खड़ा कर दिया गया, लेकिन जिम्मेदार मीटिंग हॉल बनाना ही भूल गए। अब इस कमी को पूरा करने के लिए कलेक्टर से पास की 0.25 एकड़ जमीन मांगी गई है, जिस पर करीब 10 करोड़ रुपए और खर्च होने की तैयारी है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, सीढ़ियों के पास ही नहीं बल्कि इसी हिस्से में दो अन्य जगहों पर भी खुले एरिया हैं। यहां से नीचे गिरने का खतरा साफ नजर आता है। इतनी ऊंची और व्यस्त इमारत में इस तरह की खामियां कर्मचारियों और आम लोगों दोनों के लिए जोखिम पैदा कर सकती हैं।

ऑफिस शिफ्टिंग के बीच बढ़ी चिंता

चिंता की बात यह भी है कि इन खामियों के बावजूद निगम के अलग-अलग विभागों का यहां शिफ्ट होना शुरू हो गया है। रोजाना बड़ी संख्या में कर्मचारी और नागरिक इस भवन में आएंगे। ऐसे में अगर सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए, तो किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। मामले पर नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने कहा कि वे इस संबंध में जानकारी लेंगे। यदि कहीं कोई खामी पाई जाती है तो उसे दूर कराया जाएगा। हालांकि, सवाल यह है कि इतनी बड़ी परियोजना में ऐसी बुनियादी गलतियां आखिर कैसे रह गईं।

जवाबदेही पर उठते सवाल

करोड़ों रुपए के सार्वजनिक धन से बनी इस इमारत की खामियां अब सिस्टम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रही हैं। लोग जानना चाहते हैं कि डिजाइन पास करने से लेकर निर्माण पूरा होने तक जिम्मेदारों ने आखिर निगरानी क्यों नहीं की।

Related News
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp