भोपाल में हुई प्रेस वार्ता में मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार पर तीखे सवाल दागे। उन्होंने दावा किया कि सरकारी स्कूलों से सात वर्षों में 56 लाख बच्चे गायब हो गए हैं और सरकार इस गंभीर तथ्य पर भी चुप्पी साधे बैठी है। पटवारी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के हालिया बयान का हवाला देते हुए कहा कि मंत्री ने स्वयं स्वीकार किया है कि मध्य प्रदेश के लाखों बच्चों ने आज तक फलों का स्वाद तक नहीं चखा। कांग्रेस अध्यक्ष ने इसे शिक्षा और पोषण व्यवस्था की “सबसे बड़ी विफलता” बताया।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि राज्य में मिड-डे मील योजना कागज़ों तक सीमित है। उन्होंने कहा कि बच्चों को पोषण के नाम पर सूखी रोटी और नमक दिया जा रहा है, जबकि सरकारी दस्तावेजों में प्रतिदिन 12 रुपये का पोषण खर्च दर्शाया गया है। उनका आरोप था कि गायों के लिए 40 रुपये रोज दिखाए जा सकते हैं, पर बच्चों के लिए 12 रुपये भी सही से खर्च नहीं हो पाते।
5 गुना बढ़े बजट के बावजूद हालात बदतर
पटवारी ने बताया कि 2017 में शिक्षा बजट 7,000 करोड़ रुपये था, जो 2024-25 में 37,000 करोड़ तक पहुंच गया है। आरोप है कि बजट बढ़ने के बाद भी स्कूलों में न तो शिक्षक बढ़े, न सुविधाएं। उन्होंने कहा कि 1,400 स्कूल अब भी एक ही शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं, और 10,000 से अधिक स्कूल बिना प्रिंसिपल के हैं। कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकारी UDISE+ डेटा का हवाला देते हुए कहा कि 2017-18 में कक्षा 1 से 12 तक 1 करोड़ 60 लाख बच्चे दर्ज थे, जबकि 2024-25 में यह संख्या घटकर 1 करोड़ 4 लाख रह गई। पटवारी ने सवाल उठाया कि ये 56 लाख बच्चे कहां गए? क्या यह ड्रॉपआउट की आंधी है, या बच्चों को मजदूरी और सामाजिक संकटों ने स्कूल से दूर कर दिया?
आज से करीब 7 साल पहले मध्यप्रदेश में 1 करोड़ 60 लाख बच्चे स्कूलों में थे, और अब यह संख्या घटकर सिर्फ़ 1 करोड़ 4 लाख रह गई है! यानी पूरे 50 लाख बच्चे गायब!
ऊपर से कमाल देखिए, तब बजट 7 हज़ार करोड़ था, अब वही बजट 37 हज़ार करोड़ का हो गया है! कहाँ जा रहा है यह पैसा? और किसके विकास… pic.twitter.com/5pk23wdwzL
— Jitendra (Jitu) Patwari (@jitupatwari) December 8, 2025
30,000 करोड़ रुपये आखिर गए कहाँ?
पटवारी ने सरकार पर भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अतिरिक्त 30,000 करोड़ का बजट बच्चों तक नहीं पहुंचा। उन्होंने पूछा कि क्या यह रकम मिड-डे मील के ठेकेदारों, आउटसोर्सिंग कंपनियों और कमीशनखोर अफसरों में बंट गई? पत्रकार वार्ता में उन्होंने सरकार के लिए 10 सवालों की सूची जारी की, जिसमें लापता बच्चों की खोज, बजट खर्च की पारदर्शिता, मिड-डे मील की गुणवत्ता और विभागीय घोटालों की जांच जैसे मुद्दे शामिल थे। उन्होंने कहा, “जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री ही कमियों को स्वीकार कर चुके हैं, तो सरकार अब किन बातों से बच रही है?”
पटवारी ने कहा कि यह सिर्फ राजनीतिक बहस नहीं बल्कि 56 लाख बच्चों का भविष्य है। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से पूछा, “अपने ही केंद्रीय मंत्री के बयान के बाद भी आप मौन क्यों हैं? कब तक बच्चों के हक़ खाने वालों को बचाया जाएगा?”
