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भोपाल जिले के 924 किसान बने ‘कृषक सूर्य मित्र’, सोलर पंप से आसान हुई सिंचाई

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Published On: 24 January 2026

भोपाल जिले में किसानों के लिए सिंचाई अब पहले से अधिक आसान और किफायती होती जा रही है। भारत सरकार की पीएम कुसुम योजना के घटक-बी के तहत प्रदेश में संचालित “प्रधानमंत्री कृषक सूर्य मित्र योजना” से सैकड़ों किसान लाभान्वित हो रहे हैं। इस योजना के अंतर्गत ऑफग्रिड सोलर पंपों की स्थापना तेजी से की जा रही है, जिससे किसानों की पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम हो रही है और खेती की लागत में उल्लेखनीय कमी आ रही है।

योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को दिन के समय निर्बाध सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराना है। सोलर पंपों के माध्यम से अब किसानों को बिजली कटौती या डीजल खर्च की चिंता नहीं करनी पड़ रही है। इससे न केवल उत्पादन लागत घटी है, बल्कि समय पर सिंचाई संभव होने से फसल की गुणवत्ता और उत्पादकता में भी सुधार हो रहा है।

भोपाल: किसान-अनुकूल वित्तीय मॉडल से बढ़ी भागीदारी

योजना के तहत सोलर पंप स्थापना के लिए एक सरल और किसान-अनुकूल वित्तीय ढांचा तैयार किया गया है। इसमें किसान को केवल 10 प्रतिशत अंशदान करना होता है, जबकि 30 प्रतिशत अनुदान केंद्र सरकार द्वारा दिया जाता है। शेष 60 प्रतिशत राशि बैंक ऋण के रूप में उपलब्ध कराई जाती है, जिसकी गारंटी मध्यप्रदेश शासन देता है। इस आसान व्यवस्था के चलते अधिक से अधिक किसान योजना से जुड़ रहे हैं।

ऋण प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को नोडल बैंक नियुक्त किया गया है। डिजिटल लेंडिंग सिस्टम के माध्यम से किसानों के ऋण आवेदनों की प्रक्रिया को तेज किया जा रहा है, जिससे वेंडर समय पर सोलर पंप स्थापना का कार्य शुरू कर सकें।

प्रक्रिया हुई डिजिटल

योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को कुसुम-बी राज्य पोर्टल के माध्यम से एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF) में ऑनलाइन आवेदन करना होता है। इसके बाद नोडल बैंक में किसान का खाता और CIF की उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है। डिजिटल लेंडिंग के जरिए बैंक द्वारा ऋण की अंतिम स्वीकृति दी जाती है, जिससे पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और समयबद्ध हो गई है।

जारी हुए वर्क ऑर्डर

31 दिसंबर 2025 तक भोपाल जिले में कुल 924 किसानों के लिए सोलर पंप स्थापना के वर्क ऑर्डर जारी किए जा चुके हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि योजना को किसानों से अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। जिला प्रशासन के अनुसार, आने वाले समय में और अधिक किसानों को इस योजना से जोड़ा जाएगा। सोलर पंपों के उपयोग से न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है, बल्कि यह पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। डीजल और पारंपरिक बिजली की खपत कम होने से कार्बन उत्सर्जन में कमी आ रही है और टिकाऊ खेती को प्रोत्साहन मिल रहा है।

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