प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को जमीन पर उतारने की दिशा में MP सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। इस साल नवंबर में सीहोर जिले में कृषि उद्योग समागम 2025 एग्रीकल्चर इंडस्ट्री कॉन्क्लेव का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन सिर्फ किसानों और कृषि उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें आधुनिक तकनीक, उद्योग और विभिन्न विभागों की भागीदारी भी होगी। सरकार का मानना है कि इससे किसानों को नई तकनीकों से सीधे जुड़ने का मौका मिलेगा और कृषि क्षेत्र में नए निवेश और संभावनाओं के रास्ते खुलेंगे।
समिति बनी
कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन कर दिया है। किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के सचिव को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा कृषि विभाग और उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के आयुक्तों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
इस समिति में कई बड़े विभागों को जोड़ा गया है, जिनमें सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग, औद्योगिकी नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग, सहकारिता, जनसंपर्क, मत्स्य विकास, पशुपालन एवं डेयरी, कृषि अभियांत्रिकी, मंडी बोर्ड और ग्रामीण आजीविका मिशन शामिल हैं। यानी साफ है कि यह आयोजन सिर्फ कृषि क्षेत्र तक सीमित न रहकर उद्योग, निवेश और ग्रामीण विकास से भी जुड़ने वाला है।
किसानों को होगा सीधा फायदा
सरकार का कहना है कि इस समागम से किसानों को सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि वे नई तकनीक और उद्योग जगत के लोगों से सीधे रूबरू हो पाएंगे। बीज से लेकर प्रसंस्करण तक और बाजार से लेकर निर्यात तक हर स्तर पर किसान नई जानकारी हासिल कर पाएंगे। इसके अलावा, लघु और मध्यम उद्योगों के जुड़ने से गांव और कस्बों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
सीहोर क्यों चुना गया
सीहोर जिला खेती-किसानी के लिहाज़ से हमेशा चर्चाओं में रहा है। यहां बड़ी संख्या में किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ आधुनिक तरीकों को अपनाने में भी आगे रहते हैं। इसी वजह से सरकार ने यहां इस बड़े आयोजन को कराने का निर्णय लिया है। कुल मिलाकर कृषि उद्योग समागम 2025 न सिर्फ किसानों के लिए एक बड़ा मंच साबित होगा, बल्कि प्रदेश की कृषि और औद्योगिक नीतियों के लिए भी दिशा तय करेगा।
