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भोपाल अयोध्या बायपास पेड़ कटाई, एनजीटी ने स्थगन रखा बरकरार; NHAI को दो दिन में दस्तावेज जमा करने के निर्देश

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Published On: 8 January 2026

भोपाल के अयोध्या बायपास में हजारों पेड़ काटने के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने गुरुवार को सुनवाई की। याचिकाकर्ता नितिन सक्सेना की ओर से ट्रिब्यूनल को बताया गया कि NHAI ने 22 दिसंबर को दिए गए एनजीटी के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। एनजीटी ने स्पष्ट किया कि उच्चतम न्यायालय में लंबित अपील के निर्णय तक इस मामले की कार्रवाई स्थगित रहेगी और स्थगन अभी बरकरार रहेगा।

सुनवाई के दौरान NHAI के अधिवक्ता ने मौखिक रूप से बताया कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपनी अपील वापस ले ली है, लेकिन इसका कोई दस्तावेज पेश नहीं किया। एनजीटी ने दो दिन के भीतर अपील वापस लेने का आधिकारिक प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा। यदि प्रमाण नहीं दिया गया तो उच्चतम न्यायालय के निर्णय तक एनजीटी इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं करेगा।

भोपाल अयोध्या बायपास पेड़ कटाई

एनएचएआई भोपाल के अयोध्या बायपास को आसाराम चौराहा से रत्नागिरि तिराहे तक 10 लेन में चौड़ा कर रहा है। यह 16 किलोमीटर लंबा प्रोजेक्ट है, जिसकी लागत 836.91 करोड़ रुपए है। इस योजना में कुल 7871 पेड़ काटे जाने हैं, जिनकी उम्र 40 से 80 साल तक है। दिसंबर में तीन दिनों में लगभग आधे पेड़ काट दिए गए थे, जिसके बाद मामला एनजीटी में पहुंचा।

एनजीटी सुनवाई के दौरान पर्यावरणविदों की भी उपस्थिति रही, जो बची हुई पेड़ों की सुरक्षा के लिए सक्रिय हैं। कुछ पर्यावरणविद पहले ही ‘चिपको आंदोलन’ जैसे कार्यक्रम कर चुके हैं और वे पेड़ों को बचाने के लिए सतर्क हैं।

सेंट्रल प्रोजेक्ट

यह चौड़ीकरण केंद्रीय परियोजना है, जिसमें पेड़ कटाई की अनुमतियां एनएचएआई की जिम्मेदारी हैं। दिसंबर में टेंडर और अन्य प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद भी पेड़ कटाई की अनुमति नवंबर-अगस्त की बजाय एनजीटी के हस्तक्षेप के कारण रुकी हुई है। एनजीटी के आदेश के बाद नगरीय विकास विभाग ने हाई लेवल कमेटी का गठन किया। कमेटी ने दिसंबर की तीसरी बैठक में पेड़ काटने की अनुमति दी, जिसके बाद 21 दिसंबर से कटाई शुरू हुई थी। स्थगन के आदेश के कारण अब इस प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगी हुई है।

याचिकाकर्ता को मिली राहत

स्थगन आदेश से याचिकाकर्ता नितिन सक्सेना को बड़ी राहत मिली है। हजारों पेड़ों की कटाई पर रोक लगी रहने से पर्यावरण को गंभीर नुकसान से बचाया जा रहा है और आगे की सुनवाई उच्चतम न्यायालय के निर्णय तक टली रहेगी।

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