राजधानी भोपाल में जनजातीय संस्कृति, शिल्प और लोककलाओं का बड़ा मंच सजने जा रहा है। भोपाल हाट में 7 फरवरी से 15 फरवरी 2026 तक नौ दिवसीय ‘आदि महोत्सव’ का आयोजन किया जाएगा। इस महोत्सव में प्रदेश और देश के अलग-अलग हिस्सों से आए जनजातीय कलाकार अपनी परंपरागत कला, शिल्प और सांस्कृतिक पहचान को प्रस्तुत करेंगे। आयोजन का उद्देश्य जनजातीय समाज की समृद्ध विरासत को आम लोगों तक पहुंचाना है।
आदि महोत्सव में जनजातीय शिल्पकारों द्वारा तैयार किए गए हस्तनिर्मित उत्पाद आकर्षण का केंद्र रहेंगे। यहां लकड़ी, बांस, धातु, कपड़ा और मिट्टी से बने पारंपरिक उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री की जाएगी। यह मंच शिल्पकारों को सीधे ग्राहकों से जोड़ने का अवसर देगा, जिससे उनकी कला को पहचान और बाजार दोनों मिल सकें।
लोकनृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
महोत्सव के दौरान हर दिन जनजातीय लोकनृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अलग-अलग जनजातियों की वेशभूषा, संगीत और नृत्य शैलियां दर्शकों को भारत की सांस्कृतिक विविधता से रूबरू कराएंगी। पारंपरिक ढोल, मांदल और अन्य वाद्य यंत्रों की धुन पर होने वाली प्रस्तुतियां माहौल को जीवंत बना देंगी।
10 फरवरी (मंगलवार) को आदि महोत्सव की संगीत संध्या खास रहने वाली है। इस दिन एक प्रोफेशनल म्यूजिक ग्रुप द्वारा ऑर्केस्ट्रा म्यूजिकल नाइट का आयोजन किया जाएगा। आधुनिक और लोक संगीत के मेल से सजी यह शाम युवाओं और परिवारों दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र होगी।
परिवारों और युवाओं के लिए मनोरंजन
आदि महोत्सव को हर आयु वर्ग के लोगों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। बच्चों के लिए मनोरंजन गतिविधियां, युवाओं के लिए लाइव म्यूजिक और परिवारों के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम महोत्सव को एक संपूर्ण अनुभव बनाएंगे। भोपाल हाट का खुला और पारंपरिक माहौल इस आयोजन को और खास बना देगा।
नौ दिनों तक चलने वाला यह महोत्सव न सिर्फ मनोरंजन का माध्यम होगा, बल्कि जनजातीय समाज की परंपराओं, जीवनशैली और कला को समझने का अवसर भी देगा। आयोजकों का कहना है कि आदि महोत्सव जनजातीय कलाकारों और शिल्पकारों को सम्मान देने के साथ-साथ सांस्कृतिक संवाद को मजबूत करेगा।
