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भोपाल-इंदौर रोड को मिलेगी नई पहचान, बनेगा विक्रमादित्य द्वार; CM यादव करेंगे भूमिपूजन

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Published On: 13 December 2025

भोपाल-इंदौर स्टेट हाईवे पर जल्द ही एक भव्य विक्रमादित्य द्वार नजर आएगा। इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रतीकात्मक द्वार का भूमिपूजन शनिवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव करेंगे। यह द्वार उज्जैन में बने विक्रमादित्य द्वार की तर्ज पर तैयार किया जाएगा, जिसकी डिजाइन को अंतिम रूप दे दिया गया है। इसके निर्माण से राजधानी और प्रदेश की आर्थिक राजधानी को जोड़ने वाले मार्ग को एक अलग पहचान मिलेगी।

भूमिपूजन कार्यक्रम भोपाल-इंदौर स्टेट हाईवे स्थित शासकीय महाराणा प्रताप स्कूल परिसर, फंदा में आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम को लेकर प्रशासनिक तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। आयोजन स्थल पर सुरक्षा, यातायात और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर संबंधित विभागों को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

होगा भूमिपूजन

हुजूर विधायक रामेश्वर शर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री इसी कार्यक्रम के दौरान पीएम ई-बस सेवा के संचालन के लिए बनने वाले डिपो का भी भूमिपूजन करेंगे। यह डिपो राजधानी के सार्वजनिक परिवहन को मजबूती देगा और शहर में पर्यावरण के अनुकूल परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देगा। ई-बस सेवा शुरू होने से यात्रियों को सुगम, सस्ता और आधुनिक परिवहन विकल्प मिलेगा।

कार्यक्रम से एक दिन पहले शुक्रवार को विधायक रामेश्वर शर्मा ने आयोजन स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने मंच, पार्किंग, यातायात व्यवस्था और आमजन की सुविधाओं को लेकर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कहा कि कार्यक्रम व्यवस्थित और गरिमापूर्ण तरीके से संपन्न होना चाहिए।

दो साल पूरे होने पर आयोजन

विधायक शर्मा ने बताया कि प्रदेश में मोहन यादव सरकार के दो साल पूरे होने के अवसर पर यह आयोजन किया जा रहा है। बीते दो वर्षों में सरकार ने विकास, सुशासन और जनकल्याण के कई अहम कदम उठाए हैं। सड़क, परिवहन, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में लगातार काम हुआ है। भोपाल-इंदौर रोड पर बनने वाला विक्रमादित्य द्वार केवल एक संरचना नहीं होगा, बल्कि यह प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक विकास सोच का प्रतीक बनेगा। सरकार की मंशा है कि विकास के साथ-साथ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को भी सहेजा जाए।

परिवहन को मिलेगी नई रफ्तार

पीएम ई-बस सेवा के लिए बनने वाला डिपो भोपाल के परिवहन तंत्र में बड़ा बदलाव लाएगा। इससे न केवल यातायात का दबाव कम होगा, बल्कि आम लोगों को सुरक्षित और सुविधाजनक सफर का विकल्प भी मिलेगा। यह पहल राजधानी को स्मार्ट और पर्यावरण-संवेदनशील शहर बनाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

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