महू से इंदौर होते हुए भोपाल तक चलने वाली भोपाल इंटरसिटी एक्सप्रेस 19323/19324 इन दिनों यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। पहले 24 कोच के साथ संचालित होने वाली यह ट्रेन अब केवल 18 कोच में चल रही है। कोचों की संख्या घटने से रोजाना सफर करने वाले हजारों यात्रियों को भारी भीड़, सीट न मिलना और चढ़ने-उतरने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
यह इंटरसिटी ट्रेन महू की सैन्य छावनी, इंदौर के व्यावसायिक केंद्र और राजधानी भोपाल को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण रेल सेवा मानी जाती है। सुबह 6:15 बजे महू से रवाना होकर यह ट्रेन इंदौर के रास्ते भोपाल पहुंचती है और शाम को भोपाल से लौटकर महू आती है। विद्यार्थी, नौकरीपेशा लोग, व्यापारी, सरकारी अधिकारी-कर्मचारी और दैनिक यात्री बड़ी संख्या में इसी ट्रेन पर निर्भर हैं।
भोपाल इंटरसिटी
महू, इंदौर और देवास के अलावा कई यात्री भोपाल से अन्य प्रमुख शहरों के लिए कनेक्टिंग ट्रेनें पकड़ते हैं। कोचों की कमी से ट्रेन की कुल वहन क्षमता घट गई है, जिसका असर आगे की यात्राओं पर भी पड़ रहा है। यात्रियों का कहना है कि अब सामान्य दिनों में भी स्थिति त्योहार जैसी हो गई है।
500 यात्रियों की क्षमता प्रभावित
रेलवे मामलों के जानकार नागेश नामजोशी के अनुसार 6-7 कोच कम होने से प्रतिदिन लगभग 500 यात्रियों की क्षमता प्रभावित हो रही है। कम डिब्बों के कारण लोग गलियारों और दरवाजों पर खड़े होकर सफर करने को मजबूर हैं। कई बार ट्रेन में चढ़ने तक में धक्का-मुक्की की स्थिति बन जाती है।
वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं?
यात्रियों का सवाल है कि यदि कोचों का मेंटेनेंस पहले से तय था, तो वैकल्पिक डिब्बों की व्यवस्था क्यों नहीं की गई। उनका कहना है कि कई दिनों से यह समस्या बनी हुई है, लेकिन अब तक ठोस समाधान नहीं निकला। नियमित यात्रियों ने रेलवे प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द पुराने कोच बहाल किए जाएं या अतिरिक्त डिब्बे जोड़े जाएं, ताकि सफर सुरक्षित और सुविधाजनक बन सके।
