भोपाल मेट्रो के कमर्शियल संचालन से पहले कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम ने गुरुवार को ट्रेन और डिपो का निरीक्षण किया। यह टीम मेट्रो की सुरक्षा और संचालन व्यवस्था का जायजा लेने के लिए सुभाषनगर डिपो और प्राथमिकता कॉरिडोर के 6.22 किलोमीटर रूट पर गई। टीम ने मेट्रो में सवार होकर स्टेशन और डिपो से जुड़ी सभी सुविधाओं का निरीक्षण किया।
ट्रेन और डिपो में हुई जांच
पहली टीम ने ट्रेन के कोचों की सुरक्षा और यात्रियों की सहूलियत पर ध्यान दिया। सीसीटीवी कैमरे, वातानुकूलित कोच, चार्जिंग पॉइंट और वास्तविक समय यात्री सूचना प्रणाली जैसी सुविधाओं का परीक्षण किया गया। डिपो में ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर (OCC), अनुरक्षण-बे, स्टेबलिंग लाइन, रिपेयर-बे और फायर सेफ्टी की स्थिति देखी गई। कमिश्नर जनक कुमार गर्ग ने खुद ट्रेन में बैठकर निरीक्षण किया।
अगली टीम करेगी समीक्षा
अब CMRS की दूसरी टीम मेट्रो के सभी आठ स्टेशनों सुभाषनगर, केंद्रीय स्कूल, डीबी मॉल, एमपी नगर, आरकेएमपी, डीआरएम तिराहा, अलकापुरी और एम्स का निरीक्षण करेगी। टीम स्टेशन पर एंट्री-एग्जिट, यात्रियों के लिए सुविधाएं और सुरक्षा व्यवस्था पर रिपोर्ट तैयार करेगी। दोनों टीमों की रिपोर्ट के आधार पर ही मेट्रो के कमर्शियल रन की तारीख तय होगी।
अक्टूबर में प्रस्तावित कमर्शियल रन
भोपाल मेट्रो का कमर्शियल रन अक्टूबर में प्रस्तावित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसे हरी झंडी दिखाएंगे और वे भोपाल मेट्रो के पहले यात्री भी बन सकते हैं। 31 मई को इंदौर मेट्रो को भोपाल से हरी झंडी दिखाई गई थी, इसके बाद भोपाल मेट्रो पर तेजी से काम शुरू हुआ।
भोपाल में पहला मेट्रो रूट एम्स से करोंद तक 16.05 किलोमीटर लंबा है। 2018 में प्राथमिकता कॉरिडोर के रूप में एम्स से सुभाषनगर के बीच निर्माण शुरू हुआ। सुभाषनगर से आरकेएमपी तक काम पूरा हो चुका है। अलकापुरी, एम्स और डीआरएम स्टेशनों के कुछ कार्य अभी शेष हैं। रूट पर दो स्टील ब्रिज भी बनाए गए हैं।
निरीक्षण और ट्रायल का इतिहास
भोपाल मेट्रो का पहला ट्रायल 3 अक्टूबर 2023 को हुआ था। उस समय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सुभाषनगर से रानी कमलापति स्टेशन तक मेट्रो का सफर किया था। अब CMRS की जांच पूरी होने के बाद ही आम जनता के लिए मेट्रो का संचालन शुरू होगा।
