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इंदौर की मौतों के बाद भोपाल सतर्क, महापौर के सख्त निर्देश; अवधपुरी से शुरू हुई जांच

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Published On: 1 January 2026

इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से 9 लोगों की मौत के बाद पूरे प्रदेश में हड़कंप है। इस दर्दनाक घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या शहरों की नल जल व्यवस्था पूरी तरह सुरक्षित है? इसी आशंका के चलते अब भोपाल नगर निगम भी अलर्ट मोड में आ गया है। भोपाल की महापौर मालती राय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए नगर निगम के सभी इंजीनियरों को फील्ड में उतरने के निर्देश दिए हैं। सब इंजीनियर, असिस्टेंट इंजीनियर और सुपरवाइजरों को अपने-अपने क्षेत्रों में जल आपूर्ति लाइनों का निरीक्षण करने को कहा गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं दूषित पानी की सप्लाई तो नहीं हो रही।

महापौर ने अधीक्षण यंत्री और कार्यपालन यंत्रियों को विशेष निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी है। निर्देश साफ हैं कि हर निरीक्षण की लिखित रिपोर्ट तैयार की जाए और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। नगर निगम का फोकस खासतौर पर उन इलाकों पर है, जहां पहले सीवेज या पाइपलाइन से जुड़ी शिकायतें आती रही हैं।

अवधपुरी से शुरू हुई जांच

बुधवार को नगर निगम की टीम अवधपुरी इलाके में पहुंची। दरअसल, करीब आठ महीने पहले यहां पाइप्ड नेचुरल गैस की सप्लाई अचानक बंद हो गई थी। जांच में पता चला था कि एक निजी वेंडर द्वारा नाले के पास की जा रही खुदाई में भूमिगत गैस पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसी पुराने अनुभव को देखते हुए अब आशंका जताई जा रही है कि कहीं इसी तरह की खुदाई या सीवेज लाइन की वजह से पीने के पानी की पाइपलाइन भी प्रभावित तो नहीं हुई। इसी कारण अवधपुरी के कुछ घरों से पानी के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं।

सीवेज मिलने का डर

नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, रोजाना सीवेज से जुड़ी कई शिकायतें मिलती हैं। कहीं पाइप लाइन लीकेज है तो कहीं गंदा पानी आने की सूचना। ऐसे में यह डर बना हुआ है कि कहीं सीवेज का पानी पीने के पानी में तो नहीं मिल रहा। इसी आशंका को दूर करने के लिए टीमें लगातार जांच कर रही हैं। भोपाल में तीन साल पहले हुआ एक बड़ा हादसा आज भी लोगों को डरा देता है। ईदगाह हिल्स की मदर इंडिया कॉलोनी में क्लोरीन गैस रिसाव से अफरा-तफरी मच गई थी। लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत हुई थी, कई को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।

तब समय रहते पानी की सप्लाई रोक दी गई थी, जिससे बड़ा नुकसान टल गया। नगर निगम अब उसी अनुभव से सबक लेते हुए किसी भी खतरे से पहले कार्रवाई करना चाहता है, ताकि भोपाल में इंदौर जैसी त्रासदी दोहराई न जाए।

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