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MP News: मकर संक्रांति से पहले शिक्षकों को बड़ा तोहफा, 35 साल की सेवा पर मिलेगा चौथा क्रमोन्नति वेतनमान

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Published On: 14 January 2026

MP सरकार ने मकर संक्रांति से एक दिन पहले प्रदेश के शिक्षकों को बड़ी राहत दी है। मंगलवार को हुई मोहन सरकार की कैबिनेट बैठक में प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में कार्यरत सहायक शिक्षक (एलडीटी) और उच्च श्रेणी शिक्षक (यूडीटी) को चौथा क्रमोन्नति वेतनमान देने का निर्णय लिया गया। यह फैसला लंबे समय से लंबित मांगों में से एक माना जा रहा था।

सरकार के इस निर्णय से प्रदेश के करीब 1.22 लाख शिक्षक लाभान्वित होंगे, जिन्होंने 35 वर्ष की सेवा पूरी कर ली है। एलडीटी और यूडीटी दोनों संवर्ग के शिक्षकों को यह वेतनमान दिए जाने से उनके वेतन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों में इस फैसले को लेकर संतोष और उत्साह देखा जा रहा है।

MP News: वेतन में होगी बड़ी बढ़ोतरी

चौथा क्रमोन्नति वेतनमान लागू होने के बाद एलडीटी शिक्षकों का औसत वेतन करीब 1.15 लाख रुपए तक पहुंच जाएगा, जबकि यूडीटी शिक्षकों का औसत वेतन 1.25 लाख रुपए से अधिक हो जाएगा। शिक्षा विभाग का मानना है कि इससे शिक्षकों के मनोबल में बढ़ोतरी होगी और शिक्षा व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह वेतनमान 1 जुलाई 2023 से प्रभावी माना जाएगा। जिन शिक्षकों की 35 साल की सेवा जुलाई 2023 से पहले पूरी हो चुकी है, उन्हें उसी तारीख से अब तक का पूरा एरियर दिया जाएगा। अनुमान के मुताबिक, एरियर की राशि 1.20 लाख से 1.80 लाख रुपए तक हो सकती है।

सेवा अवधि के अनुसार मिलेगा एरियर

जिन शिक्षकों की 35 वर्ष की सेवा अवधि 2023 से 2026 के बीच पूरी होगी, उन्हें सेवा पूर्ण होने की तिथि से एरियर का भुगतान किया जाएगा। इससे अलग-अलग चरणों में शिक्षकों को आर्थिक लाभ मिलेगा और वर्षों से रुके हुए भुगतान की समस्या भी खत्म होगी।

कैबिनेट बैठक में शिक्षा के साथ-साथ कई अहम नीतिगत फैसले भी लिए गए। प्रदेश में स्पेस टेक नीति–2026 को मंजूरी दी गई, जिससे मध्यप्रदेश देश का तीसरा राज्य बन गया है जहां यह नीति लागू हुई है। इस नीति से अगले पांच वर्षों में करीब 1000 करोड़ रुपए के निवेश और 8 हजार रोजगार सृजन की संभावना जताई गई है।

ई-कैबिनेट की पहल

कैबिनेट ने 800 मेगावाट की सोलर-सह-स्टोरेज परियोजनाओं को भी मंजूरी दी। इसके साथ ही यह बैठक पूरी तरह ई-कैबिनेट रही, जिसमें मुख्यमंत्री और मंत्री फाइलों की जगह टैबलेट लेकर शामिल हुए। सरकार का उद्देश्य पेपरलेस सिस्टम, पारदर्शिता और समय की बचत को बढ़ावा देना है।

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