पूर्व कृषि मंत्री और कांग्रेस विधायक सचिन यादव ने MP की मौजूदा स्थिति को “किसान त्रासदी” करार देते हुए कहा है कि भाजपा सरकार ने किसान को हर मोर्चे पर अकेला छोड़ दिया है। उत्पादन लागत बढ़ती जा रही है, बाजार में दाम नहीं मिल रहे, फसल बीमा भरोसेमंद नहीं रहा और सरकारी व्यवस्थाएं कमजोर कर दी गई हैं। उनका कहना है कि यह हालात किसी चूक का नहीं, बल्कि किसान विरोधी नीतियों का नतीजा हैं।
कमलनाथ सरकार का दौर
सचिन यादव ने कहा कि कमलनाथ सरकार के कार्यकाल में किसानों को राहत नहीं, बल्कि सुरक्षा का भरोसा मिला था। जय किसान ऋण मुक्ति योजना के तहत 27 लाख किसानों का करीब 11,500 करोड़ रुपये का फसल ऋण माफ किया गया। 10 हॉर्स पावर तक के बिजली बिल आधे किए गए। प्याज किसानों को मुख्यमंत्री प्याज कृषक प्रोत्साहन योजना के जरिए सीधा लाभ मिला। नकली खाद-बीज के खिलाफ सख्त कार्रवाई, कृषि उपकरणों पर बढ़ी सब्सिडी और हजार गौशालाओं के निर्माण से खेती और पशुधन दोनों को सहारा मिला।
जमीनी सच्चाई
कांग्रेस नेता ने कहा कि भाजपा ने चुनाव से पहले किसानों से बड़े-बड़े वादे किए। 10 घंटे निर्बाध बिजली, सोयाबीन की एमएसपी पर नियमित खरीदी, गेहूं और धान के ऊंचे दाम घोषित किए गए। लेकिन हकीकत यह है कि गांवों में अघोषित बिजली कटौती जारी है। 2025 में सोयाबीन की सरकारी खरीदी बंद कर दी गई और भावांतर जैसी योजनाओं से किसान को नुकसान हुआ। सोयाबीन का दाम आज भी 12 साल पुराने स्तर पर अटका है।
मूंग की खरीदी को लेकर पहले अफवाहें फैलाई गईं, फिर आंदोलन के दबाव में खरीदी शुरू हुई, लेकिन भुगतान में देरी हुई। मक्का किसानों को एमएसपी से 1000-1200 रुपये कम दाम मिल रहे हैं। केंद्र ने साफ कहा कि राज्य सरकार ने खरीदी का प्रस्ताव ही नहीं भेजा। कपास में स्लॉट बुकिंग और नमी के नाम पर किसानों को परेशान किया गया। प्याज किसानों को दो रुपये किलो तक का भाव नहीं मिल रहा, जिससे वे फसल फेंकने को मजबूर हैं।
बाहर की साजिश
बुरहानपुर के केला उत्पादक किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है। उचित बाजार भाव नहीं मिल रहा और फसल बीमा का कोई प्रावधान नहीं है। सचिन यादव ने आरोप लगाया कि सरकार ने जानबूझकर केले को बीमा योजना से बाहर रखा, जिससे हजारों किसानों के साथ नीतिगत अन्याय हुआ। डीएपी की कमी छुपाने के लिए भ्रामक बयान दिए गए। खरीफ और रबी दोनों सीजन में खाद संकट रहा। लाइन में खड़े किसानों पर लाठीचार्ज हुआ, थप्पड़ मारे गए और दो किसानों की जान चली गई। इसके बावजूद सरकार ने संवेदना दिखाने के बजाय किसानों को ही दोषी ठहराया।
फसल बीमा पर सवाल
सचिन यादव ने कहा कि फसल बीमा में किसानों से करीब 10 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। कहीं शून्य, कहीं 11-17 रुपये का मुआवजा किसानों के साथ मजाक है। मंडी बोर्ड पर 1700 करोड़ की देनदारी है, कर्मचारी वेतन-पेंशन से जूझ रहे हैं और मंडियों को आर्थिक रूप से कमजोर किया जा रहा है, ताकि व्यवस्था निजी हाथों में दी जा सके। कांग्रेस नेता ने कहा कि उज्जैन, खंडवा, श्योपुर और मुरैना जैसे जिलों में किसान आत्महत्या को मजबूर हैं। भाजपा जहां किसानों से वादे तोड़ रही है, वहीं कांग्रेस ने हमेशा कर्ज माफी, लागत घटाने और बाजार-बिमा सुरक्षा देने का काम किया है। उन्होंने कहा कि किसान को फिर से केंद्र में लाना होगा, वरना यह संकट और गहराएगा।
