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केरवा डैम लो डेंसिटी एरिया में बुलडोजर कार्रवाई, 23 एकड़ में विकसित अवैध निर्माणों पर चला प्रशासन का डंडा

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Published On: 15 February 2026

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देशों के पालन में शनिवार को जिला प्रशासन ने केरवा डैम के लो डेंसिटी एरिया में बड़ी कार्रवाई की। बरखेड़ी बाजयाफ्त की पंचायत कुशालपुरा और पंचायत भानपुर केकड़िया में विकसित हो रहे फार्म हाउस और अवैध कॉलोनी पर बुलडोजर चलाया गया। दोनों स्थानों पर कॉलोनी संचालकों ने विरोध जताया, लेकिन प्रशासन की सख्ती के आगे उनकी एक नहीं चली। करीब 23 एकड़ में फैले निर्माणों पर दिनभर कार्रवाई जारी रही।

जानकारी के मुताबिक कुशालपुरा में पहले फिल्म सिटी विकसित करने की योजना थी। फिल्म निर्माता प्रकाश झा ने यहां लगभग 20 एकड़ जमीन खरीदी थी, लेकिन परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी। बाद में योजना बदलकर टीएंडसीपी की अनुमति से एक-एक एकड़ के 13 फार्म हाउस विकसित किए जाने लगे। एक फार्म हाउस की कीमत 8 से 9 करोड़ रुपये बताई जा रही है। प्रशासन का दावा है कि यह क्षेत्र केरवा डैम के संवेदनशील जोन में आता है।

केरवा डैम लो डेंसिटी

लोक निर्माण विभाग ने भी शिकायत की थी कि निर्माणकर्ताओं ने सरकारी सड़क पर बाउंड्रीवॉल खड़ी कर दी है, जिससे सड़क चौड़ीकरण में बाधा आ रही थी। साथ ही अवैध कॉलोनी विकसित किए जाने की शिकायतें भी प्रशासन तक पहुंची थीं। केरवा डैम के कैचमेंट क्षेत्र में निर्माण को लेकर मामला एनजीटी में पहुंचा, जिसके बाद नियमित निरीक्षण और एफटीएल (फुल टैंक लेवल) की मार्किंग के निर्देश दिए गए।

अवैध कॉलोनी की सड़क उखाड़ी

पंचायत भानपुर केकड़िया में लगभग 3 एकड़ में विकसित की जा रही कॉलोनी पर भी कार्रवाई की गई। प्रशासन ने बाउंड्रीवॉल तोड़ी और जेसीबी से सीमेंट सड़क उखाड़ दी। अधिकारियों के अनुसार कॉलोनी बिना वैध अनुमति विकसित की जा रही थी। इस जमीन का बाजार मूल्य करीब 5 करोड़ रुपये आंका गया है। दोनों जगहों की कुल जमीन की कीमत 55 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।

प्रशासन और डेवलपर के बयान

डेवलपर देवेश शुक्ला का कहना है कि सभी आवश्यक अनुमतियों के साथ फार्म हाउस विकसित किए जा रहे हैं और उन्हें कोई नोटिस नहीं मिला। वहीं एसडीएम हुजूर विनोद सोनकिया ने बताया कि राजस्व अधिकारियों द्वारा कार्रवाई की गई है और दस्तावेजों की जांच जारी है। एनजीटी के निर्देशों के तहत एफटीएल क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने और नियमित निगरानी की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।

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