सतना में नवनिर्मित इंटर स्टेट बस टर्मिनल (ISBT) को मुख्यमंत्री द्वारा लोकार्पित किए हुए एक महीना बीत चुका है, लेकिन अब तक बसों की पूर्ण शिफ्टिंग नहीं हो सकी है। सरकार का उद्देश्य शहर की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाना और यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना था, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है।
कलेक्टर के सख्त निर्देशों के बावजूद कुछ बस ऑपरेटर ISBT में शिफ्ट होने से इनकार कर रहे हैं। आधे से अधिक ऑपरेटर नए बस टर्मिनल में स्थानांतरित हो चुके हैं, लेकिन कुछ गुटों के विरोध के चलते पूरी प्रक्रिया अटक गई है। इसका सीधा असर अंतरराज्यीय बस सेवाओं पर पड़ रहा है, क्योंकि अभी तक ISBT से एक भी अंतरराज्यीय बस का नियमित संचालन शुरू नहीं हो पाया है।
सतना ISBT आर्थिक नुकसान
बसों के पुराने बस स्टैंड और बीच शहर में अवैध स्टॉपेज बने रहने से यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। कई बसें अब भी अलग-अलग जगहों से संचालित हो रही हैं, जिससे यात्रियों को समय, पैसे और सुविधा तीनों का नुकसान उठाना पड़ रहा है। यात्रियों का कहना है कि नई सुविधा शुरू होने की बजाय व्यवस्था और ज्यादा अव्यवस्थित हो गई है।
अव्यवस्था लगातार जारी
पुराने बस स्टैंड के आसपास और प्रमुख चौराहों पर अवैध स्टॉपेज के कारण रोजाना ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रहती है। सुबह और शाम के समय शहर में अफरा-तफरी का माहौल रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बसों की शिफ्टिंग समय पर पूरी कर ली जाती, तो शहर की यातायात व्यवस्था काफी हद तक सुधर सकती थी।
ISBT परियोजना पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन अब तक इसका पूरा लाभ जनता को नहीं मिल पा रहा है। प्रशासन पर यह आरोप लग रहे हैं कि वह बस ऑपरेटरों के दबाव के आगे मजबूती से खड़ा नहीं हो पा रहा। इससे मुख्यमंत्री के उस उद्देश्य पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं, जिसमें सतना को सुगम और सुव्यवस्थित परिवहन सुविधा देने की बात कही गई थी।
जनता की उम्मीदें
स्थानीय नागरिकों और यात्रियों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द ठोस कदम उठाकर ISBT से बसों का पूर्ण संचालन सुनिश्चित करेगा। यदि शिफ्टिंग प्रक्रिया शीघ्र पूरी नहीं हुई, तो यह महत्वाकांक्षी परियोजना कागजों तक ही सीमित रह जाएगी और शहर की यातायात समस्या और गंभीर होती चली जाएगी।
