कैंसर उपचार का क्षेत्र अब तेजी से पुराने दायरे से बाहर निकल रहा है। जिन ट्यूमर को अब तक जिद्दी, बार-बार लौटने वाला या लगभग लाइलाज माना जाता था, उनके लिए विज्ञान नई और असरदार तकनीकें लेकर आ रहा है। ब्रेन ट्यूमर, सिर और गले के जटिल कैंसर, साथ ही रेडिएशन-रेजिस्टेंट ट्यूमर के इलाज को लेकर जो निराशा थी, वह अब धीरे-धीरे उम्मीद में बदल रही है।
भोपाल स्थित आईसीएमआर-भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (बीएमएचआरसी) में आयोजित चौथे इंटरनेशनल स्कूल ऑन रेडिएशन रिसर्च (ISRR-2025) के अंतिम दिन यही तस्वीर सामने आई। विशेषज्ञों ने साफ कहा कि आने वाले समय में रेडियोथेरेपी ज्यादा सटीक होगी, इलाज का समय घटेगा और सामान्य ऊतकों को होने वाला नुकसान भी न्यूनतम रहेगा।
वैज्ञानिकों का अनुभव
सम्मेलन में जापान, जर्मनी, स्वीडन और भारत से आए वैज्ञानिकों ने अपने शोध अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि नई रेडिएशन तकनीकें अब सिर्फ ट्यूमर कोशिकाओं को निशाना बना रही हैं, जिससे आसपास के स्वस्थ टिशु काफी हद तक सुरक्षित रहते हैं। विशेषज्ञों ने यह भी माना कि भारत इस क्षेत्र में पीछे नहीं है और सही नीतियों व निवेश के साथ आधुनिक कैंसर उपचार आम मरीजों तक पहुंच सकता है। जापान के ओकोयामा विश्वविद्यालय स्थित न्यूट्रॉन थेरेपी रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिक डॉ. कजुयो इगावा ने न्यूट्रॉन बोरॉन कैप्चर थेरेपी (BNCT) को गेम चेंजर बताया। उनके अनुसार, यह तकनीक उन कैंसरों में खासतौर पर कारगर साबित हो रही है, जिन पर पारंपरिक रेडियोथेरेपी बेअसर रहती है। ब्रेन ट्यूमर और हेड-नेक कैंसर के मरीजों में इसके नतीजे उत्साहजनक हैं।
कम साइड इफेक्ट
डॉ. इगावा ने बताया कि BNCT की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सीधे कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करती है, जबकि आसपास के सामान्य ऊतक लगभग सुरक्षित रहते हैं। इससे साइड इफेक्ट कम होते हैं और मरीज की जीवन गुणवत्ता बेहतर रहती है। साथ ही, कैंसर के दोबारा लौटने की आशंका भी काफी हद तक घट जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि कई मामलों में यह थेरेपी एक ही सत्र में पूरी हो जाती है।
सोसाइटी ऑफ रेडिएशन रिसर्च के संस्थापक अध्यक्ष और भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. केपी मिश्रा ने BNCT की कार्यप्रणाली को सरल शब्दों में समझाया। उन्होंने कहा कि सबसे पहले मरीज को बोरॉन आधारित विशेष दवा दी जाती है, जो केवल ट्यूमर कोशिकाओं में जाकर जमा होती है। सामान्य कोशिकाएं इससे लगभग प्रभावित नहीं होतीं।
असरदार संयोजन
इसके बाद मरीज को न्यूट्रॉन विकिरण दिया जाता है। न्यूट्रॉन जब बोरॉन से अभिक्रिया करते हैं तो अल्फा कण उत्पन्न होते हैं। इन कणों की ऊर्जा इतनी तीव्र होती है कि वे कैंसर कोशिकाओं को नष्ट कर देती हैं। डॉ. मिश्रा ने स्पष्ट किया कि केवल न्यूट्रॉन विकिरण से इलाज संभव नहीं है, इसकी सफलता बोरॉन दवा के साथ सही संयोजन पर निर्भर करती है। सम्मेलन के दौरान यह बात बार-बार उभरकर सामने आई कि यदि भारत में इन आधुनिक तकनीकों को चरणबद्ध तरीके से अपनाया जाए, तो आने वाले वर्षों में कैंसर इलाज की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य की रेडियोथेरेपी न सिर्फ ज्यादा प्रभावी होगी, बल्कि मरीजों के लिए कम कष्टदायक और अधिक सुरक्षित भी साबित होगी।
